रायपुर: जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला को इस वर्ष ‘एशियन साइंटिस्ट 100’ सूची में शामिल किया गया है.
यह प्रतिष्ठित सूची एशिया के उन वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नेतृत्वकर्ताओं को सम्मानित करती है, जिन्होंने पिछले वर्ष किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होकर अथवा किसी महत्वपूर्ण खोज या नेतृत्व व्यवसाय द्वारा उल्लेखनीय योगदान दिया हो.
पिछले ही साल आलोक शुक्ला को गोल्डमैन एनवायर्नमेंटल प्राइज 2024 से सम्मानित किया गया था. छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक के रूप में, वे आदिवासी समुदायों के साथ काम करते रहे हैं. उनके प्रयास से छत्तीसगढ़ में हज़ारों एकड़ जैव-विविधता संपन्न वनभूमि को खनन से बच पाई है.
Asian Scientist Magazine द्वारा वर्ष 2016 से प्रकाशित की जा रही यह सूची एशिया के उन श्रेष्ठ वैज्ञानिकों और नेताओं को पहचान देती है, जिन्होंने पिछले वर्ष किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मान प्राप्त किया हो या अपने क्षेत्र में असाधारण नेतृत्व और खोज प्रस्तुत की हो.
आठवें संस्करण में शामिल भारतीय वैज्ञानिकों की यह उपस्थिति बताती है कि भारत न केवल विज्ञान और अनुसंधान में बल्कि पर्यावरणीय और सामाजिक नेतृत्व में भी एशिया में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
आलोक शुक्ला के साथ भारत के कई शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को भी Asian Scientist 100 (2025) सूची में स्थान मिला है. इनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, और जैव चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशेषज्ञ शामिल हैं.
इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं-
सी. आनंदरामकृष्णन: नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक, जिन्हें Tata Transformation Prize 2024 मिला है.
गोविंदराजन पद्मनाभन: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वरिष्ठ वैज्ञानिक, जिन्हें विज्ञान रत्न अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया.
रोहित श्रीवास्तव: IIT बॉम्बे के वैज्ञानिक, जिन्हें मेडिकल डायग्नोस्टिक्स और नैनोटेक्नोलॉजी में नवाचार के लिए सम्मान मिला.
बृंदा कश्यप: UNESCO के “Man and the Biosphere Young Scientist Award” की विजेता, जिन्होंने असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में गैंडे के संरक्षण पर कार्य किया.
पुरबी सैकिया: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक, जिन्हें पौधा पारिस्थितिकी और जैव विविधता पर शोध के लिए शांति स्वरूप भटनागर युवा पुरस्कार 2024 से नवाजा गया.
सिद्धेश कमत: IISER पुणे के शोधकर्ता, जिन्हें Infosys Prize 2024 (Life Sciences) प्राप्त हुआ.
ज्योतिर्मयी मोहंती: भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, मुंबई की वरिष्ठ वैज्ञानिक, जिन्हें IUPAC Distinguished Women in Chemistry Award मिला.
पुर्नानंद गुप्तसरमा: IISER मोहाली के वैज्ञानिक, जिन्हें Tata Transformation Prize 2023 मिला है, प्लास्टिक अपशिष्ट को नष्ट करने की नई तकनीक विकसित करने के लिए.
शिल्पी शर्मा: IIT दिल्ली की शोधकर्ता, जिन्हें कृषि पारिस्थितिकी और फूड सिक्योरिटी पर काम के लिए सम्मानित किया गया.
विजय बी. शेनॉय: IISc बेंगलुरु के भौतिक विज्ञानी, जिन्हें JC Bose Fellowship 2023 प्राप्त हुई.
COUTESY:CG KHABAR





































