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कोरबा@M4S: विद्युत वितरण विभाग द्वारा बकाया वसूली अभियान चलाया जा रहा है। बकायादारों के कनेक्शन विच्छेद किए जा रहे हैं। घरेलू और कमर्शियल के बाद वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पहले शासकीय विभाग भी रडार में आएंगे। इस कड़ी में निकायों के बकाया बिजली बिल समायोजन किए गए हैं।

कोरबा निगम के साथ-साथ पांचों निकाय की बिजली कटने से बच गई। शासन ने बिजली बिल का करीब दो करोड़ का समायोजन करने का आदेश किया है। इस समायोजन में सबसे अधिक बिल कटघोरा नगर पालिका परिषद् का था।आर्थिक रूप से कमजोर निकायों के पास बिजली बिल जमा करने के लिए भी फंड नहीं है।कार्यालय, स्ट्रीट लाइट, पेयजल व्यवस्था समेत तमाम जगहों पर बिजली का उपयोग करने के बाद बिल जमा नहीं किया जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब बिजली बिल को लेकर निकायों ने इस तरह असमर्थता जताई। इससे पहले भी तीन बार बिल जमा या तो शासन स्तर पर किया गया है या तो इस बार की तरह समायोजन कर राहत दी गई है। पिछले साल का बिजली बिल जमा करने के लिए विद्युत वितरण विभाग द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। दिसंबर में निकायों की समीक्षा बैठक में सभी निकायों से लंबित बिजली बिल की जानकारी मांगी गई थी। इसमें निकायों ने बताया था कि उनके पास बिल जमा करने के लिए आर्थिक तौर पर परेशानियां है। इसे देखते हुए शुक्रवार को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बिजली बिल का समायोजन करने आदेश जारी किया है। इससे निकायों ने राहत की सांस ली है।प्रदेश के सभी 12 निगमों का भी बिजली बिल समायोजित किया गया है। इसमें कोरबा निगम का 39.51लाख रूपए का समायोजन किया गया है। प्रदेश के अन्य निकायों की तुलना में कोरबा निगम ने सबसे कम बिजली बिल का समायोजन किया है। निकायों के बिजली बिल बढऩे के पीछे कई वजह है। इसमें मुख्य तौर पर वजह यही है कि कई जगह मीटर खराब या फिर अधिक रीडिंग कर रहे हैं। इन्हें बदलने के लिए निकाय व वितरण कंपनी रूचि नहीं लेते हैं। दूसरी वजह है कि बिल जमा करना नहीं होता है इसलिए स्ट्रीट लाइटों को समय पर बंद नहीं किया जाता है। एक जगह मरम्मत के लिए सडक़ की पूरी लाइटों को दिन भर चालू रखा जाता है।








