क्या है सैगोंग फॉल्ट? जिसने म्यांमार व थाईलैंड में मचाई तबाही, आगे भी विनाशकारी भूकंप का खतरा

- Advertisement -
नई दिल्ली(एजेंसी): म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप के बाद भारत ने 50 टन राहत सामग्री भेजी है। दोनों देशों के अधिकारी संपर्क में हैं। म्यांमार में भूकंप से मरने वालों का आंकड़ा एक हजार के पार हो चुका है। सैगोंग फॉल्ट ने म्यांमार में तबाही मचाई है। आइये जानते हैं भूकंप के लिए जिम्मेदार सैगोंग फॉल्ट के बारे में। 

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है म्यांमार
म्यांमार भूकंप के लिहाज से सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। ग्लोबल सीस्मिक रिस्क मैप पर म्यांमार रेड जोन में है। इसका मतलब है भूकंप का मध्यम से अधिक खतरा। 

सैगोंग शहर के पास से गुजरती है दरार

म्यांमार में धरती की सतह के नीचे की चट्टानों में एक बहुत बड़ी दरार मौजूद है, जो देश के कई हिस्सों से होकर गुजरती है। यह दरार म्यांमार के सैगोंग शहर के पास से गुजरती है इसलिए इसका नाम सैगोंग फॉल्ट पड़ा। यह म्यांमार में उत्तर से दक्षिण की तरफ 1200 किमी तक फैली हुई है।

तेजी से खिसक रही हैं चट्टानें लाती हैं शक्तिशाली भूकंप

इसे ‘स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट’ कहते हैं। इसका मतलब है कि इसके दोनों तरफ की चट्टानें एक-दूसरे के बगल से हॉरिजॉन्टल दिशा में खिसकती हैं, ऊपर-नीचे नहीं। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे दो किताबें टेबल पर रखी हों और उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ स्लाइड किया जाए। सैगोंग फॉल्ट में चट्टानों के खिसकने की अनुमानित रफ्तार 11 मिलीमीटर से 18 मिलीमीटर सालाना है।चट्टानों के लगातार खिसकने से ऊर्जा का दबाव बनता है और यह समय-समय पर भूकंप के रूप में ऊर्जा बाहर निकलती है। सालाना 18 मिलीमीटर तक जमीन खिसकने का मतलब है कि यहां जमीन के नीचे काफी अधिक हलचल है। इसकी वजह से बड़े पैमाने पर ऊर्जा इकठ्ठा हो रही है, जो शक्तिशाली भूकंप ला सकती है।

इन देशों तक लगे भूकंप के झटके

म्यांमार में आए भूकंप से बड़े पैमाने पर जान माल का नुकसान हुआ है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7 से अधिक थी और इसके झटके म्यांमार के अलावा थाईलैंड, बांग्लादेश, भारत, वियतनाम और चीन तक महसूस किए गए। 

अगले हफ्ते थाईलैंड जाएंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी अगले हफ्ते तीन व चार अप्रैल को बैंकाक की यात्रा पर जाने वाले हैं। वहां चार अप्रैल 2025 को छठा बिम्सटेक शिखर सम्मेलन होने वाला है जिसमें भारत, थाईलैंड, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे। 

प्रधानमंत्री मोदी की तीसरी थाईलैंड यात्रा की तैयारियां चल ही रही थीं कि ठीक एक हफ्ते पहले वहां भूकंप आ गया है। भूकंप से शिखर सम्मेलन पर होने वाले असर को लेकर जब सवाल पूछा गया तो विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘हम थाईलैंड के साथ संपर्क में हैं। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं है कि हम कुछ कह सकें।

Related Articles

http://media4support.com/wp-content/uploads/2020/07/images-9.jpg
error: Content is protected !!