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देवपहरी, सतरेंगा, बुका और नकिया का वाटरफॉल मोह रहा मन
कोरबा@M4S:वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले में स्थित पर्यटन स्थलों पर हरियाली बढ़ गई है। इससे पर्यटन स्थलों की सुंदरता पर्यटकों के मन को मोह रही है। जिले में कई पर्यटन स्थल ऐसे हैं,जो खूबसूरत होने के बावजूद सतरेंगा जैसे प्रसिद्ध नहीं हो सके हैं। लेकिन उनकी खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है। कोरबा के ऐसे कई पर्यटन स्थल और पिकनिक स्पॉट हैं, जहां जाकर फर्यटक फुर्सत के पल बिता सकते हैं। यहां पानी और हरियाली की छटा खासतौर पर मानसून की शुरुआत के साथ ही और भी खूबसूरत हो जाती है। वैसे तो कोरबा का नाम औद्योगिक नगरी के तौर पर विख्यात है, लेकिन शहर से कुछ दूर निकालने पर ऐसे कई स्थान हैं, जो प्राकृतिक खूबसूरती से घिरे हुए हैं। कुछ स्थान ऐसे हैं जहां जाते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिला मुख्यालय से सतरेंगा की दूरी 35 किलोमीटर है। बांगो डेम बनने के बाद सतरेंगा डूबान क्षेत्र में आया। पहाड़ की चोटी शिवलिंग के आकार की है, इसलिए इसे महादेव पहाड़ की संज्ञा दी जाती है। मौजूदा समय में यहां बोटिंग करने के साथ ही पर्यटकों के रुकने के लिए रिसॉर्ट भी है। लेकिन वर्तमान में बोटिंग बंद है। रिसॉर्ट में भी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं बावजूद इसके ऊर्जाधानी से इस क्षेत्र में पर्यटकों का आना-जाना लगातार लगा हुआ है।
कॉफी प्वाइंट बालको से कुछ दूरी पर स्थित है। यहां का रास्ता घाटियों से होते हुए पहाड़ी के ऊपर जाता है। पहाड़ी और घाटी वाले रास्ते हिमाचल प्रदेश के हिल स्टेशनों की याद दिलाते हैं। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद यहां से नजर जहां तक जाती है, हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है। कॉफी प्वाइंट में वन विभाग द्वारा एक रेस्ट हाउस का निर्माण भी किया गया है। जहां ऊपर से नीचे का नजारा विहंगम और मनोरम दिखाई देता है। शाम को यहां से शहर की टिमटिमाते रोशनी और हरियाली को देखना बेहद सुकून दायक होता है।
देवपहरी और रानी झरिया का झरना
देवपहरी और रानी झरिया का झरना दोनों पर्यटन स्थल सतरेंगा के आसपास ही हैं। सतरेंगा जाते हुए रास्ते में रानी झरिया का झरना है। मुख्य सड़क से लगभग 4 किलोमीटर जंगल के भीतर ट्रैकिंग कर जाना पड़ता है। ट्रैकिंग का एक्सपीरियंस आपको हिमाचल के वादियों का अहसास कराता है। रानी झरिया का पानी बेहद ठंडा है, इससे आगे बढ़ने पर आपको गोविंद कुंज जलप्रपात देवपहरी में मिलेगा। यह जलप्रपात भी बेहद मनोरम है। हालांकि बरसात के मौसम में यह थोड़ा खतरनाक भी हो जाता है।
कॉफी प्वाइंट
इको फ्रेंडली पर्यटन स्थल बुका कटघोरा वन मंडल के अंदर आता है, जो कटघोरा अंबिकापुर मार्ग पर है। यहां मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता, लेकिन आप प्रकृति से कनेक्ट हो सकते हैं। वन विभाग ने यहां ग्लास हाउस बनाया है यहां भी पानी की बड़ी झील है। इससे कुछ दूर पर गोल्डन आइलैंड भी है। बुका और गोल्डन आइलैंड को मिलाकर लगभग 35 छोटे-छोटे टापू यहां मौजूद हैं। इस जगह को और भी डेवलप किया जा रहा है। गोल्डन आइलैंड में उगते सूरज को देखना बेहद खास मौका है क्योंकि सुबह ऐसा लगता है मानो सुनहरे रंग की चादर बिछी हो।





































