800 बार लगवाई उठक-बैठक,6वीं का छात्र अस्पताल में भर्ती; ओडिशा के सुंदरगढ़ में रैगिंग का खौफनाक चेहरा

- Advertisement -

राउरकेला(एजेंसी):सुंदरगढ़ स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रैगिंग का एक बेहद खौफनाक और अमानवीय मामला सामने आया है। यहां रात के अंधेरे में सीनियर छात्रों की दबंगई इस कदर हावी है कि वे कमरे की खिड़की-दरवाजे बंद कर नए और जूनियर छात्रों के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर रहे हैं।

जूनियर छात्रों को सीनियरों के जूठे बर्तन मांजने, कपड़े धोने और पैर दबाने के लिए मजबूर किया जाता है। मना करने पर बंद कमरे में उनकी बेरहमी से पिटाई की जाती है।

पिछले कुछ महीनों से चल रहे इस शारीरिक और मानसिक शोषण के बीच एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कमरे में बनाया बंधक
बीती 14 तारीख की रात जब हॉस्टल वार्डन मुख्य गेट पर ताला लगाकर चले गए, तब सातवीं कक्षा के पांच छात्रों ने महज तीन महीने पहले दाखिला लेने वाले छठी कक्षा के एक मासूम छात्र को कमरे में बंधक बना लिया।

सीनियरों ने उसे कान पकड़कर एक हजार बार उठक-बैठक करने का तुगलकी फरमान सुनाया। जब मासूम रोने-गिड़गिड़ाने लगा, तो उसे कपड़े टांगने वाले हैंगर से बेरहमी से पीटा गया।

खौफजदा छात्र ने डर के मारे 800 बार उठक-बैठक की और अंततः बेसुध होकर फर्श पर गिर पड़ा। उस मासूम की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने सीनियर छात्रों के जूठे बर्तन धोने, कपड़े साफ करने और पैर दबाने से साफ इनकार कर दिया था।

अस्पताल में भर्ती 

इस खौफनाक प्रताड़ना के दो दिन बाद 17 तारीख की सुबह जब पीड़ित छात्र प्रार्थना कर रहा था, तब वह अचानक गश खाकर गिर पड़ा और बेहोश हो गया। आनन-फानन में स्कूल प्रशासन ने उसे सुंदरगढ़ के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया।

खबर मिलते ही दूर गांव से बदहवास पिता अस्पताल पहुंचे और अपने जिगर के टुकड़े को ऑक्सीजन सपोर्ट पर देख फूट-फूटकर रो पड़े। करीब ढाई घंटे बाद जब छात्र को होश आया, तो वह भी पिता को सामने देख बुरी तरह बिलख पड़ा। 18 तारीख की दोपहर तबीयत में कुछ सुधार होने पर पिता उसे अस्पताल से सीधा अपने घर ले गए।

इस खौफनाक मंजर के बाद से पीड़ित छात्र इस कदर दहशत में है कि वह अब स्कूल जाने के नाम से ही कांप रहा है। आहत पिता का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे पर कभी हाथ तक नहीं उठाया, ऐसे में कोई और उसे इतनी बेरहमी से कैसे पीट सकता है।

उन्होंने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही और अनदेखी को जिम्मेदार ठहराया है। विडंबना यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी स्कूल प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

उल्टे मामले पर पर्दा डालने और अपनी नाकामी छिपाने के लिए प्रिंसिपल ने खबर संकलन करने गए मीडियाकर्मियों तक को स्कूल परिसर में घुसने नहीं दिया। वहीं, इस पूरे मामले पर प्रभारी जिला कल्याण अधिकारी विवेकानंद महंती ने कहा है कि घटना उनके संज्ञान में है और मामले की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Related Articles