नई दिल्ली(एजेंसी):Zoho के CEO श्रीधर वेम्बु ने WhatsApp के एन्क्रिप्शन दावों को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि Meta का मेन काम विज्ञापनों से पैसा कमाना है, जो कि यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा के दावों के बीच एक बड़ा टकराव पैदा करता है।
उनका ये कमेंट शुक्रवार को सैन फ्रांसिस्को की एक अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा दायर होने के बाद आया है, जिसमें मेटा पर अरबों WhatsApp यूजर्स को उनकी प्राइवेसी के बारे में गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। ऑस्ट्रेलिया, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के शिकायतकर्ता दावा करते हैं कि कंपनी का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन असल में सिर्फ एक दिखावा है।
वेम्बु ने X पर लिखा, ‘एक सामान्य सिद्धांत के तौर पर, जब आप यूजर की आदतों पर आधारित विज्ञापनों पर निर्भर रहते हैं, तो प्राइवेसी कभी भी पहली प्राथमिकता नहीं हो सकती। हितों का टकराव वास्तविक और गंभीर है।’ उन्होंने आगे कहा कि जब पब्लिक मार्केट का दबाव ‘बहुत ज्यादा वैल्यूएशन’ को सही ठहराने के लिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफे की मांग करता है, तो ये मानना ‘नासमझी’ होगी कि ये कंपनियां यूजर की प्राइवेसी को पहले रखेंगी।
मेटा ने आरोपों से इनकार किया
मेटा ने इन आरोपों का जोरदार खंडन किया है। कम्युनिकेशन्स डायरेक्टर एंडी स्टोन ने इन दावों को ‘पूरी तरह से झूठा और बेतुका’ बताया और कहा कि WhatsApp एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहा है।
कंपनी ने चेतावनी दी है कि वह शिकायत करने वालों के वकीलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही है।
मुकदमे में अनाम व्हिसलब्लोअर का हवाला दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर खुलासा किया है कि मेटा के कर्मचारी एक इंटरनल सिस्टम के जरिए यूजर के मैसेज को एक्सेस करने के लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं। शिकायत के मुताबिक, कर्मचारियों को सिर्फ इंजीनियरिंग टीम को एक टास्क रिक्वेस्ट सबमिट करनी होती है, जो ‘अक्सर बिना किसी जांच के’ एक्सेस दे देती है।
एलन मस्क, पॉल ड्यूरोव ने WhatsApp की सुरक्षा के दावों पर सवाल उठाए
इस विवाद पर टेक इंडस्ट्री से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। एलन मस्क ने यूजर्स को WhatsApp के खिलाफ चेतावनी दी, इसे असुरक्षित बताया और यहां तक कि सिग्नल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया। टेलीग्राम के CEO पावेल ड्यूरोव ने हमेशा की तरह बेबाकी से कहा: ‘अगर आप 2026 में ये मानते हैं कि WhatsApp सुरक्षित है, तो आप दिमागी तौर पर कमजोर हैं।’ उन्होंने दावा किया कि टेलीग्राम द्वारा WhatsApp के एन्क्रिप्शन सिस्टम के एनालिसिस में कई ‘अटैक वेक्टर्स’ पाई गई हैं।
51 पन्नों के मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि एक बार जब मेटा के कर्मचारियों को एक्सेस मिल जाता है, तो वे एक विजेट के जरिए रियल-टाइम में मैसेज देख सकते हैं, जिसके लिए किसी अलग डिक्रिप्शन की जरूरत नहीं होती। रिपोर्ट के मुताबिक, मैसेज बिना एन्क्रिप्टेड सोर्स के कंटेंट के साथ मिले-जुले दिखाई देते हैं, और यूजर्स द्वारा पहली बार अपना अकाउंट एक्टिवेट करने के समय से ही एक्सेस किए जा सकते हैं।
वेम्बु की आलोचना इसलिए खास है क्योंकि ये तकनीकी बारीकियों पर ध्यान केंद्रित नहीं करती है। इसके बजाय, वह स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम पर जोर देते हैं: एक ऐसी कंपनी जो यूजर के बिहेवियर को ट्रैक करके पैसे कमाती है, उसे हमेशा प्राइवेसी के बजाय डेटा कलेक्शन को प्राथमिकता देने का दबाव झेलना पड़ेगा। उनकी अपनी कंपनी, Zoho, बिना विज्ञापन के सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करती है।
ये मुकदमा क्लास-एक्शन स्टेटस और हर्जाने की मांग कर रहा है। इस बीच, मेटा ने कानूनी कार्रवाई को ‘मनगढ़ंत कहानी’ कहने के अलावा कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।






