मुंबई(एजेंसी):AI के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को अब स्थानीय स्तर पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। महाराष्ट्र के ठाणे और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तम में निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने गूगल-अदानी और अमेजन द्वारा समर्थित विशाल डेटा सेंटर परियोजनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों में बन रहे ये डेटा सेंटर स्थानीय जल स्रोतों, बिजली आपूर्ति और भूमि पर अत्यधिक दबाव डालेंगे, जबकि कंपनियां उन्नत कूलिंग तकनीकों का हवाला दे रही हैं।
अमेजन और गूगल ने रखा अपना पक्ष
हालांकि, बढ़ते जनाक्रोश के बीच अमेजन और गूगल ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि वे उन्नत एयर-कूलिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और स्थानीय पीने के पानी या पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सख्त मानकों का पालन करेंगे।
गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है, जब केंद्र सरकार डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। इसी साल फरवरी में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में पीएम मोदी ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों से अपने डेटा को भारत में ही रखने का आग्रह किया और देश को एआई बुनियादी ढांचे के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया।
भारत में डेटा केंद्रों को 2022 में बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया, जबकि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में योग्य विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 2047 तक कर छूट की घोषणा की गई। कई राज्यों ने भी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं।
क्यों हो रहा विरोध?
ठाणे में बन रहा डेटा सेंटर बल्कुम और माजिवाड़ा में लगभग 53-58 एकड़ में फैली हुई है। विरोध प्रदर्शन के अभियान का नेतृत्व कर रही साधना प्रधान ने कहा कि ठाणे की आधी आबादी टैंकर के पानी पर निर्भर है। रिहायशी इलाके में डेटा सेंटर क्यों बनाया जा रहा है और सभी नागरिकों को परेशानी में क्यों डाला जा रहा है?
निवासियों का कहना है कि वे तकनीक या एआई के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में देश के सबसे बड़े डेटा सेंटरों में से एक का निर्माण करने के खिलाफ हैं, क्योंकि इससे आबादी पर पड़ने वाले प्रभाव पर पूरी तरह विचार नहीं किया गया।
निवासियों ने इसका विरोध तब शुरू किया, जब उन्हें पता चला कि डेटा केंद्रों को आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखा गया है, जिससे उन्हें चिंता हुई कि पानी और बिजली की कमी के दौरान उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति मिल सकती है।
अमेजन का आया जवाब
इस विरोध के बाद अमेजन का जवाब आया है, उसने कहा कि ठाणे में बन रहे उसके डेटा सेंटर में कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हम वर्तमान में भारत में अपने किसी भी डेटा सेंटर में कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं करते हैं, और न ही कूलिंग के लिए स्थानीय पीने योग्य पानी का उपयोग करते हैं।
ठाणे डेटा सेंटर के लिए स्वीकृत जल आपूर्ति परमिट 0.01 एमएलडी है और यह पूरी तरह से बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए है, जिसमें अमेजन कर्मचारियों के लिए शौचालय और पीने का पानी शामिल है।
विशाखापत्तनम में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन
विशाखापत्तनम में भी इसी तरह का एक अभियान चल रहा है, जहां कई नागरिक समूह प्रस्तावित गूगल-अदानी हाइपरस्केल एआई डेटा सेंटर कॉम्प्लेक्स का विरोध कर रहे हैं।
1-गीगावाट (1-GW) क्लस्टर के रूप में नियोजित यह विशाल परियोजना तीन अलग-अलग स्थानों पर विभाजित होगी। यह परियोजना तारलुवाडा में लगभग 200 एकड़, अदावीवरम-मुदसारलोवा में 120 एकड़ और अनाकापल्ली जिले के रामबिल्ली में 160 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परियोजना ठाणे में उठाई गई समस्याओं को तो बढ़ाती ही है, साथ ही इसके कारण भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। इसी विरोध के तहत 19 जुलाई को 100 से अधिक लोगों ने सड़कों पर उतरकर इस परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया था।





















































