जोरदार खर्राटे और दिनभर थकान: स्लीप एप्निया के इन 5 खतरनाक संकेतों को नजरअंदाज करना है खतरनाक

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नई दिल्ली(एजेंसी):आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ती लाइफस्टाइल के कारण कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक गंभीर, लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या स्लीप एप्निया है। यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें सोते वक्त बार-बार आपकी सांस रुकने लगती है।

स्लीप एप्निया दो प्रकार का होता है- ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया (OSA) और सेंट्रल स्लीप एप्निया। इनमें ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्निया ज्यादा कॉमन है, जिसमें व्यक्ति के गले की मांसपेशियां श्वांस नली पर दबाव डालने लगती है, जिससे सोते समय सांस लेने में तकलीफ होती है। इसकी पहचान करना जरूरी है, ताकि इस परेशानी को कंट्रोल किया जा सके। आइए जानें स्लीप एप्निया के संकेत कैसे होते हैं।

बहुत जोर से खर्राटे लेना

खर्राटे लेना अक्सर गहरी नींद की निशानी माना जाता है, लेकिन हकीकत में यह एक खतरे की घंटी है। ऐसा श्वांस नली के सिकुड़ने की वजह से होता है। इसलिए अगर आप रात को तेज खर्राटे लेते हैं या इनके कारण आपके साथी की नींद खराब होती है, तो यह स्लीप एप्निया का क्लासिक लक्षण है।

सोते वक्त स्नॉर्ट करना या हांफना 

क्या कभी आपकी नींद अचानक इसलिए खुली है क्योंकि आपको लगा कि आपका दम घुट रहा है? स्लीप एप्निया में नींद के दौरान सांस कुछ सेकंड के लिए पूरी तरह रुक जाती है। जब शरीर को ऑक्सीजन की कमी महसूस होती है, तो दिमाग अचानक आपको जगा देता है। इस दौरान व्यक्ति झटके से स्नॉर्ट करता है या हवा के लिए हांफता है। यह स्थिति दिल पर भी काफी दबाव डालती है।

दिन भर नींद और थकान महसूस होना

रात को 7-8 घंटे बिस्तर पर बिताने के बाद भी अगर आप सुबह उठकर ताजगी महसूस नहीं करते, तो इसका मतलब है कि आपकी नींद की क्वालिटी खराब है। स्लीप एप्निया के कारण बार-बार सांस रुकने से व्यक्ति गहरी नींद नहीं ले पाता है। इसके कारण ऑफिस में काम करते समय, फिल्म देखते वक्त या गाड़ी चलाते समय भी तेज नींद आने लगती है।

सुबह उठते ही सिरदर्द होना

कई लोग सुबह उठते ही सिर के दोनों तरफ भारीपन या दर्द की शिकायत करते हैं। इसका कारण रात भर शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होना और कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ जाना है। दिमाग को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण सुबह तेज सिरदर्द हो सकता है।

रात भर नींद टूटना और बेचैनी

एप्निया से जूझ रहा व्यक्ति रात भर करवटें बदलता रहता है। बार-बार पेशाब आने के लिए उठना या बिना किसी कारण के अचानक नींद खुल जाना इसके संकेत हैं। व्यक्ति को महसूस होता है कि उसकी नींद कच्ची है, जबकि असल में उसका शरीर बार-बार सांस लेने की कोशिश में जाग रहा होता है।

क्यों जरूरी है इसका इलाज?

स्लीप एप्निया सिर्फ नींद की कमी नहीं है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और स्ट्रोक जैसी जानलेवा बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है।

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