कोरबा@M4S:निजी स्कूलों के बच्चों को स्कूल तक लाने ले जाने के लिए सारे नियमों को दरकिनार कर मासूमों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। ऐसा नजारा जिले के स्कूलों के बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों में देखा जा सकता है।
छह सीटर वाले वैन में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बिठाया जा रहा है। ऑटो भी ठसाठस भरे रहते हैं। बच्चे दोनों ओर सामने की शीट पर बैठे नजर आते हैं। जिससे बच्चों को खतरों के बीच सफर करने मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं हैरत की बात है कि ऐसे वाहनों की जांच की जिम्मेदारी जिनके ऊपर है, परिवहन और यातायात विभाग के जिम्मेदार कुंभकर्णी नींद में सोए हैं। आरटीओ, स्कूल संचालकों व अभिभावकों की अनदेखी से छात्र-छात्राएं खतरों भरा सफर करने को मजबूर है। यही कारण है कि अनफिट वाहनों में बच्चे हादसे का शिकार हो रहे हैं। हालत यह है कि क्षमता से दो गुना बच्चों को बैठाकर लाने ले जाने का काम कर रहे हैं। अधिकतर वाहनों में फिटनेस, पंजीयन, फर्स्ट एड बाक्स, अग्निशमन यंत्र, वाहन का रंग व नंबर सब गायब हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं।
स्कूल वाहनों में इन नियमों का पालन जरूरी
1 सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार स्कूल वाहन पीले रंग से पेंट होना चाहिए।
2 वाहन के आगे व पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
3 सभी खिड़कियों के बाहर लोहे की ग्रिल होनी चाहिए।
4 अग्निशमन यंत्र लगा हो।
5 स्कूल का नाम और फोन नंबर होना चाहिए।
6 दरवाजे में ताला लगा हो और सीटों के बीच पर्याप्त जगह होनी चाहिए।
7 चालक को कम से कम पांच साल का वाहन चलाने का अनुभव हो।
8 ट्रांसपोर्ट परिमट होना चाहिए।





































