Indian Railway: इंजन-स्‍पीड से लेकर पहिए तक बड़े बदलाव की तैयारी में भारतीय रेलवे; टॉयलेट सीट भी होगी चेंज

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कानपुर(एजेंसी): विद्युत इंजन के गौरवशाली सौ साल पूरे होने पर अब रेलवे इंजनों को और आधुनिक बनाने की दिशा में बढ़ा है। 16 के स्थान पर 12 पहिये के ये आधुनिक इंजन छोटे होंगे, लेकिन इनकी क्षमता व ताकत कम नहीं होगी। जल्द प्रत्येक यात्री ट्रेन में ये इंजन लगेंगे। इससे ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी, जबकि चालकों को आरामदायक सफर मिलेगा। इनकी मरम्मत आसान होगी। इन आधुनिक इंजनों की मरम्मत का परीक्षण फजलगंज स्थित विद्युत लोको शेड में पूरा हो चुका है। 

ये इंजन बंगाल के चितरंजन व वाराणसी लोकोमोटिव वर्क्स में बनाए जा रहे हैं।  ब्रिटिश शासनकाल में पहला बिजली इंजन वर्ष 1925 के फरवरी में पटरी पर दौड़ा था। ये एशिया की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन थी। इसके बाद तकनीक के क्षेत्र में लगातार नवाचार से इंजनों के स्वरूप बदले।
12 पहियों में तब्दील होंगे इंजन
वर्तमान में थ्री फेस इंजन पूर्ण रूप से स्वदेशी हैं। अभी अधिकांश यात्री ट्रेनों के इंजनों में 16 से 20 पहिये होते हैं, जो अब 12 पहियों में तब्दील होंगे। एक इंजन में चार बोगी लगती थीं, जो तीन लगेंगी। चार पहियों की एक बोगी होती है। इंजन की ट्रेन खींचने की क्षमता 12 हजार हार्स पावर ही रहेगी। 

ये आधुनिक सुविधाएं भी
  • इंजन में बिना पानी के शौचालय बनेंगे, जो हवा के दबाव से ही साफ हो जाएंगे।
  • नीचे पटरी के बजाय बाक्स में ही गंदगी गिरेगी।
  • चालकों के लिए आरामदायक सीट होंगी और हवा के लिए इंतजाम किए गए हैं।
नए व पुराने इंजन में अंतर
  • 45 फीट तक के 24 पहिये वाले इंजन मालगाड़ी खींचने में लगते, जो अब 16 से 20 पहिये के होंगे और इनकी लंबाई 24 से 28 फीट तक ही होगी।
  • 24 फीट लंबे यात्री ट्रेनों के 16 पहिये के इंजन अब ताकतवर मोटर के साथ 20 से 22 फीट तक 12 पहिये वाले होंगे। भविष्य में इन्हें और छोटा बनाने पर काम हो रहा है।
  • नए इंजनों की मरम्मत का काम आधुनिक ट्रैक्शन मोटर (टीएम) शाप में किया जा रहा है। इनमें आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। पूर्ण स्वदेशी होने से इनकी मरम्मत भी आसान हुई है। निकट भविष्य में और छोटे व ताकतवर इंजन तैयार होंगे।

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