गाजियाबाद(एजेंसी):‘सॉरी पापा… आई एम रियली सॉरी’ (I am really sorry) सुसाइड नोट में लिखकर गाजियाबाद की तीन नाबालिग सगी बहनों ने बिल्डिंग की नौवीं मंजिल की खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली। ये शब्द कहने और पढ़ने में जितना आसान है, उतना रियल लाइफ में नहीं। क्योंकि इन शब्दों के साथ ही गाजियाबाद के चेतन की तो जिंदगी ही उजड़ गई। जिन बेटियों को बड़े लाड-प्यार से जिंदगी जीना सिखाया, आज उन्हीं बेटियों ने जिंदगी भर का गम दे दिया। गाजियाबाद की इस घटना से हर कोई सहम गया है।
तीन बहनों ने सुसाइड नोट में और क्या लिखा?
गाजियाबाद की तीन नाबालिग बहनों ने सामूहिक आत्महत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट भी लिखा। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा है, ‘जिंदगी की सच्ची कहानी (Trure Life Story), इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो। क्योंकि ये सब सच है। अभी पढ़ो, सॉरी पापा… आई एम रियली सॉरी’। यह सुसाइड नोट गहरे मानसिक दबाव की ओर इशारा कर रहा है।

वहीं, इस घटना को लेकर डीसीपी निमिश पाटिल ने बताया, ‘चार फरवरी की सुबह हमें जानकारी मिली कि तीन लड़कियों ने एक बिल्डिंग से छलांग लगा दी। हॉस्पिटल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हमें इस मामले में एक सुसाइड नोट मिला है। सुसाइड नोट से साफ है कि तीनों लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं। किसी खास एप का नाम नहीं लिया गया। घटना के समय पूरा परिवार घर में मौजूद था, लेकिन वे सो रहे थे।’
तीनों बहनों को थी ऑनलाइन गेम खेलने की लत
पुलिस की जांच में सामने आया है कि तीनों नाबालिग बहनों को कोरियाई गेम की लत थी। हालांकि, परिजन उन्हें ऑनलाइन गेम खेलने से मना करते थे। जांच में यह भी सामने आया कि पिता ने कल ही उनसे मोबाइल लेने की बात कही थी। इसी के चलते तीनों बहनों ने मंगलवार देर रात एक साथ बिल्डिंग की नौवीं मंजिल की खिड़की से कूदकर आत्महत्या कर ली।
घटना से सोसायटी में फैली दहशत
गाजियाबाद जिले में साहिबाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र की भारत सिटी सोसायटी में हुई इस दर्दनाक घटना से पूरी सोसायटी में दहशत फैल गई है। वहीं, बुधवार सुबह जब सोसायटी के लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां का मंजर देख हर किसी की रूह कांप गई।
कोरोना के छोड़ दी थी पढ़ाई
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों बहनों ने कोरोना के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद से ही तीनों बहनों को मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की लत लगी थी।
पुलिस के अनुसार, चेतन नाम का व्यक्ति तीन साल पहले अपने परिवार के साथ यहां भारत सिटी सोसायटी में आकर रहने लगा था। तभी से परिवार इसी सोसायटी की नौवीं मंजिल पर रहता था। चेतन पहले परिवार के साथ दिल्ली में रहता था।






