गोल्ड में 17 साल बाद बड़ी गिरावट! 2008 के बाद एक महीने में सबसे ज्यादा सस्ता हुआ सोना

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नई दिल्ली(एजेंसी):गोल्ड में 17 साल बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। सोना, अक्टूबर 2008 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट (gold price crash 2026) की ओर बढ़ रहा है। जून में अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 12% टूट चुका है, जबकि मंगलवार को स्पॉट गोल्ड की कीमत 0.8% गिरकर 3,985.57 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1% फिसलकर 3,999.20 डॉलर प्रति औंस पर आ गए।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर जून के महीने में सोना 19,700 रुपए सस्ता हो चुका है। 1 जून 2026 को सोना 1,60,193 रुपए (gold price today) के लेवल पर ओपन हुआ था, जो 30 जून को 1,40,450 रुपए प्रति 10 ग्राम के लो लेवल (gold rate today) पर पहुंच गया। यानी एक महीने में गोल्ड 19,743 रुपए (gold price crash) प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है।

गोल्ड में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद, मजबूत अमेरिकी डॉलर और लगातार बनी महंगाई का है। यही वजह है कि सोना लगातार चौथे महीने गिरावट की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही 2024 के बाद पहली बार सोना तिमाही आधार पर भी नुकसान में रहने की तैयारी में है। जून 2013 के बाद यह इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट हो सकती है।

ये तीन फैक्टर सोने पर पड़ रहे भारी!

अमेरिकी मार्केट एक्सपर्ट एडवर्ड (Edward meir) मीर का कहना है कि,

इस समय ऊंची महंगाई, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और मजबूत डॉलर जैसे तीन बड़े फैक्टर सोने की तेजी पर भारी पड़ रहे हैं। आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने में खरीदारी बढ़ती है, लेकिन इस बार निवेशकों का फोकस पूरी तरह फेड की नीति पर है।

  1. गोल्ड में गिरावट के पीछे पहली और सबसे बड़ी वजह है- फेड रिजर्व की मीटिंग और केविन वॉर्श का भाषण। बाजार में फिलहाल इस साल कम से कम तीन बार फेड की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। CME FedWatch Tool के अनुसार, सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 64% आंकी जा रही है। ऐसे माहौल में सोने की निवेश के तौर पर आकर्षण कम हो सकता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों पर दूसरे निवेश विकल्प ज्यादा रिटर्न देने लगते हैं।
  2. दूसरी बड़ी वजह है- इस सप्ताह आने वाले अमेरिका के ADP रोजगार आंकड़े और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि फेड आगे कितना सख्त रुख अपना सकता है।
  3. गोल्ड में गिरावट के पीछे तीसरी और आखिरी सबसे बड़ी वजह है- अमेरिकी डॉलर का लगातार मजबूत होना। डॉलर पिछले 13 महीने के हाई लेवल पर पहुंच गया और लगातार लगातार मजबूत हो रहा है, जिससे अन्य देशों की मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा पड़ रहा है। इससे भी गोल्ड की मांग पर असर देखने को मिल रहा है।
इन तीन वजहों से गोल्ड में आ सकती है तेजी

सिंगापुर की फाइनेंशियल फर्म ओवरसी-चाइनीज बैंकिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (OCBC) के प्रीशियस मेटल्स स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वोंग (Christopher Wong) का कहना है कि सोने में मजबूत तेजी लौटने के लिए तीन चीजों में से कम से कम एक का होना जरूरी है- वास्तविक बॉन्ड यील्ड में गिरावट, डॉलर का कमजोर होना या फेड के सख्त रुख में नरमी। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक सोना पुराने रिकॉर्ड स्तरों से नीचे सीमित दायरे में कारोबार करता रह सकता है।

अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो चांदी 1.3% गिरकर 57.53 डॉलर, प्लैटिनम 0.7% टूटकर 1,563.25 डॉलर पर आ गया, जबकि पैलेडियम 0.4% बढ़कर 1,218.07 डॉलर पर कारोबार करता दिखा। हालांकि मासिक और तिमाही आधार पर तीनों धातुएं भी नुकसान में रहने की ओर बढ़ रही हैं।

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