कोरबा@M4S:नगर सेना के महिला सैनिकों में तत्कालिन जिला सेनानी के खिलाफ आक्रोश कम नही हुआ है। उनके खिलाफ करीब तीन माह पहले विशाखा कमेटी में शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक जांच शुरू नही हो सकी है। इस बीच विभागीय अधिकारी से ही जांच कराने की खबर ने महिला सैनिकों में नाराजगी बढ़ा दी है। उनकी यह नाराजगी कभी भी आंदोलन के रूप में सामने आ सकती है।
दरअसल जुलाई 2025 में नगर सेना का कमान जिला सेनानी अनुज एक्का ने संभाला था। उन्होंने पदभार लेते ही कई नियम कायदे निर्धारित कर दिए, जिसका पालन व्यवहारिक रूप से संभव ही नही था। इसके बावजूद सैनिक निर्देशों का पालन करते आ रहे थे। जिला सेनानी के खिलाफ सैनिकों का आक्रोश उस वक्त फूट पड़ा, जब उन्होंने परेड में शामिल नही होने का हवाला देते हुए सौ से अधिक सैनिकों को नोटिस जारी कर दिया। उन्हें कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने कहा गया, लेकिन वे खुद अवकाश पर चले गए। जिससे आक्रोशित सैनिकों ने जिला सेनानी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनकी समस्या का समाधान करने पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में संभागीय सेनानी नरसिंह नेताम ने दरबार लगाए। इस दरबार में महिला सैनिकों ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने जिला सेनानी अनुज एक्का पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्हें उम्मीद थी कि संभागीय सेनानी उनके हित में फैसला लेंगे, लेकिन परिणाम सिफर रहा। आखिरकार महिला सैनिकों ने विशाखा कमेटी में शिकायत का फैसला लिया। उन्हें विशाखा कमेटी की जांच से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन तीन माह बाद भी जांच शुरू नही हो सकी। बताया जा रहा है कि जांच में हो रही लेट लतीफी से महिला सैनिकों में असंतोष पनपता जा रहा है। उनका कहना है कि महिला सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों को गंभीरता से नही लिया जा रहा। बीते दिनों रायपुर की संभागीय सेनानी जांच के लिए कोरबा पहुंची थी। उन्होंने करीब तीन दर्जन सैनिकों से मैराथन पूछताछ की। वे सैनिकों का बयान दर्ज कर देर रात रायपुर लौट गई। इसे लेकर भी सैनिकों में असंतोष है। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारी से जांच कराए जाने पर निष्पक्षता की संभावना कम ही है। अपने अधिकारी को बचाने पूर्व की तरह प्रयास किया जा सकता है। चूंकि सैनिकों ने जिला सेनानी के खिलाफ दरबार में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। ऐसे में एक एक कर बयान लेने से भी जांच प्रभावित हो सकती है। यदि प्रशासनिक अफसर से जांच कराई जाती है, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।
शिकायत के तीन माह बाद भी विशाखा कमेटी की जांच नहीं हुई शुरू महिला सैनिकों में बढ़ा असंतोष, विभागीय अधिकारी से जांच कराने की खबर से नाराजगी
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