कॉलेजों में दाखिले की रफ्तार धीमी,निजी संस्थानों की 65 फीसदी सीटें खाली उच्च शिक्षा विभाग ने 31 अगस्त तक बढ़ाई प्रवेश की अवधि

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कोरबा@M4S:जिले के कॉलेजों में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश को लेकर इस बार छात्रों की रुचि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। करीब दो महीने चली प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। खास बात यह है कि सरकारी कॉलेजों की तुलना में निजी कॉलेजों की स्थिति अधिक चिंताजनक है। जिले के नौ निजी कॉलेजों में 65 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका। वहीं सरकारी कॉलेजों में भी करीब 40 प्रतिशत सीटें खाली हैं।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेजों में पहली बार प्रवेश लेने वाले नियमित विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया 14 अगस्त की अंतिम तिथि के साथ समाप्त हो गई थी। हालांकि उच्च शिक्षा विभाग ने अब प्रवेश की अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन को इस अतिरिक्त समय में बड़ी संख्या में नए प्रवेश होने की उम्मीद कम है। कॉलेजों के अनुसार, अधिकांश विद्यार्थी पहले ही दूसरे संस्थानों में प्रवेश ले चुके हैं। जिले के 15 सरकारी कॉलेजों में स्नातक स्तर की कुल 5375 सीटें हैं। इनमें से 3251 सीटों पर विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इस तरह सरकारी कॉलेजों में 60.5 प्रतिशत सीटें भर चुकी हैं, जबकि 2124 सीटें यानी 39.5 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। निजी कॉलेजों की स्थिति और कमजोर रही। जिले के नौ निजी कॉलेजों में कुल 2188 सीटों में से महज 759 सीटों पर प्रवेश हुआ। यानी निजी संस्थानों में सिर्फ 34.7 प्रतिशत सीटें ही भर पाईं। 1429 सीटें यानी 65.3 प्रतिशत सीटें खाली रह गईं।

12वीं पास विद्यार्थियों की संख्या अधिक, फिर भी सीटें खाली
जिले में सीजी बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण 7878 विद्यार्थियों के साथ सीबीएसई के करीब 2000 विद्यार्थियों को स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश का अवसर मिला था। इसके बावजूद कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध जिले के 24 कॉलेजों में कुल 7563 सीटें हैं, जिनमें से करीब 47 प्रतिशत सीटें अब तक खाली हैं। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि विद्यार्थियों का दूसरे संस्थानों की ओर रुख, पसंदीदा विषय और कॉलेज का चयन तथा निजी कॉलेजों में प्रवेश के प्रति कम रुचि खाली सीटों की प्रमुख वजहों में शामिल है। अब 31 अगस्त तक बढ़ाई गई प्रवेश अवधि में कॉलेजों की नजर बची हुई सीटों पर है।

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