नई दिल्ली(एजेंसी):क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप अपना फोन उठाते हैं, अनलॉक करते हैं और फिर सोचने लगते हैं कि मैंने आखिर फोन उठाया क्यों था?
ऐसा हम सभी के साथ कभी न कभी हुआ है और आज के डिजिटल ऐज में यह काफी आम हो चुका है, लेकिन सवाल आता है कि ऐसा होता क्यों है?
फोन उठाने और अनलॉक करने के बीच लगे कुछ सेकंड में ही हम कैसे भूल जाते हैं कि फोन हाथ में क्यों लिया था? आइए इस सवाल का जवाब डॉ. गौरव गुप्ता (सीनियर साइकायट्रिस्ट एंड सीईओ- तुलसी हेल्थकेयर, नई दिल्ली) से जानें।

वर्किंग मेमोरी की क्षमता
हमारे दिमाग में एक वर्किंग मेमोरी होती है, जो जानकारी को बहुत कम समय के लिए रोक कर रखती है। यह एक छोटे नोटपैड की तरह है। जब आप फोन उठाते हैं, तो आपका मकसद इसी वर्किंग मेमोरी में होता है।
जैसे ही आप स्क्रीन अनलॉक करते हैं, ढेरों रंग-बिरंगे ऐप्स और नोटिफिकेशन आपके दिमाग पर हमला कर देते हैं। इस कॉग्निटिव ओवरलोड के कारण दिमाग की सीमित क्षमता वाली वर्किंग मेमोरी से पुरानी बात डिलीट हो जाती है और नए खयाल उसकी जगह ले लेते हैं।
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