अजित पवार का निधन: संकट में महायुति, BJP के सामने नई चुनौती; कौन संभालेगा सत्ता की कुर्सी?

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नई दिल्ली(एजेंसी):महाराष्ट्र की राजनीति उस समय गहरे सदमे में चली गई, जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा विमान बारामती के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत सभी यात्रियों की मौत हो गई। यह सिर्फ एक बड़ा राजनीतिक नुकसान नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के लिए एक ऐसा झटका है, जिससे उबरना आसान नहीं होगा।

महाराष्ट्र में मौजूदा महायुति सरकार 2022 में बनी थी, जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना तोड़कर उद्धव ठाकरे की सरकार गिरा दी और मुख्यमंत्री बने। इसके एक साल बाद अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की एनसीपी को विभाजित कर महायुति में शामिल होकर सरकार को और मजबूती दी।

2024 विधानसभा चुनाव के बाद बदला समीकरण

शिंदे जब मुख्यमंत्री थे तब बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार उपमुख्यमंत्री बने। 2024 तक यह व्यवस्था चली, लेकिन विधानसभा चुनावों के बाद स्थिति बदलने लगी। 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 288 में से 132 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी।

शिंदे गुट की शिवसेना को 57 और अजित पवार की एनसीपी को 41 सीटें मिली। विपक्ष में उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को सिर्फ 20 सीटें मिली। इतनी बड़ी जीत के बाद एकनाथ शिंदे ने दोबारा मुख्यमंत्री बने रहने की मांग की। उनका तर्क था कि सरकार की योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज की वजह से ही महायुति को जीत मिली।

लेकिन बीजेपी इस मांग के लिए तैयार नहीं हुई। शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि बीजेपी और अजित पवार की एनसीपी मिलकर अपने दम पर सरकार बना सकती थी। बीजेपी के लिए शिंदे और अजित पवार एक-दूसरे के खिलाफ संतुलन बनाने का काम कर रहे थे, ताकि कोई एक सहयोगी ज्यादा दबाव न बना सके।

महायुति में टकराव

इसके बाद स्थानीय निकाय चुनाव आए और महायुति के भीतर टकराव खुलकर सामने आने लगा। कई जगह सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते दिखे। मुंबई, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में बीजेपी और शिंदे गुट साथ आए, जबकि अजित पवार की एनसीपी को अलग कर दिया गया।

इससे अजित पवार नाराज हुए और शरद पवार गुट के साथ फिर से नजदीकियां बढ़ने लगीं। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़, जो पहले एनसीपी के गढ़ माने जाते थे वहां दोनों पवार गुटों ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया।

आरोप-प्रत्यारोप और तीखे बयान

इसी दौरान अजित पवार ने खुलकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने खुद पर लगे 70,000 करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले के आरोपों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि बिना साबित हुए किसी को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है।

उन्होंने पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में बीजेपी शासन के दौरान भ्रष्टाचार और बढ़ते कर्ज का आरोप लगाया और कहा कि निगम लुटेरों के गिरोह से भरा हुआ था। बीजेपी ने पलटवार करते हुए अजित पवार को आत्ममंथन की सलाह दी। देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कुछ नेताओं की आवाज चुनाव के समय ही तेज होती है।

चुनाव नतीजे और नई तनातनी

बीजेपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बड़ी जीत दर्ज की और मुंबई नगर निगम में भी सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालांकि, मेयर चुनने के लिए उसे शिंदे गुट के समर्थन की जरूरत है, जिस पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है।

इसी राजनीतिक तनाव के बीच बुधवार सुबह अजित पवार का विमान बारामती के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे ने महाराष्ट्र को एक बड़ा नेता खोने के साथ-साथ महायुति को भी कमजोर कर दिया। बीजेपी के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अजित पवार गुट के विधायक शरद पवार की एनसीपी में न चले जाएं, जिससे विपक्ष मजबूत हो सकता है।

एनसीपी का भविष्य

अजित पवार की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी एनसीपी का भविष्य क्या होगा। विधानसभा और नगर निगम चुनावों में अजित पवार गुट ने शरद पवार गुट से बेहतर प्रदर्शन किया था और खुद को असली एनसीपी के रूप में स्थापित किया था।

अगर दोनों एनसीपी का विलय होता है, तो नेतृत्व को लेकर संघर्ष तेज हो सकता है। शरद पवार अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले को आगे लाना चाह सकते हैं, लेकिन अजित पवार गुट के कई नेताओं को यह मंज़ूर नहीं हो सकता।

अजित पवार गुट में अब सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और सुनेत्रा पवार जैसे नेता प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का राजनीतिक भविष्य पहले ही कमजोर माना जा रहा है।

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