चीन में 25 लाख रुपये में मिल रहा एक बंदर, आखिर एक साल में कैसे दोगुने हो गए दाम?

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बीजिंग:चीन में फार्मा इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ा संकट कोई टेक्नोलॉजी या निवेश नहीं है, बल्कि बंदर बन गए हैं। यहां बंदरों की कीमत एक साल में दोगुनी हो गई है, जिससे रिसर्च का खर्च बढ़ गया है।

नई दवाओं के परीक्षण में इस्तेमाल होने वाले साइनोमोलगस मकाक बंदरों की कीमत एक साल में ही करीब दोगुनी हो गई है। चीन की एक सरकारी लैब ने हाल ही में 40 बंदर खरीदे, जिसके लिए हर एक बंदर की कीमत 25 लाख रुपये चुकाई।

चीन में नई दवाओं को लेकर ज्यादा परीक्षण हो रहा है, जिसकी वजह से बंदरों की किल्लत होने लगी है। प्रीक्लीनिकल परीक्षण के लिए बंदरों की जरूरत होती है, क्योंकि मानव पर परीक्षण से पहले प्राइमेट्स पर सुरक्षा जांच जरूरी होती है।

चीन में लगातार बढ़ रही बंदरों की कमी की वजह से कई कंपनियों को अपनी रिसर्च रोकनी पड़ी। बंदरों की कमी होने की वजह से आशंका है कि दवाओं के परीक्षण में देरी हो सकती है, जिससे दवाइयों को बाजार तक पहुंचने में समय लग सकता है।

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