लाठी से पिटाई के बाद 55 वर्षीय महिला की मौत, रात में सूचना के बावजूद आरोपी पर कार्रवाई नहीं, डायल 112 ने घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया

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कोरबा/बांकीमोंगरा@M4S: बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के पुरेना बस्ती, दीपका रोड स्थित वार्ड क्रमांक-01 में 55 वर्षीय महिला की मौत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतिका की पहचान मोहन कुंवर यादव, उम्र लगभग 55 वर्ष के रूप में हुई है। मामले में आरोपी तीरथ राम यादव पर महिला के साथ लाठी से मारपीट करने का आरोप है।

घटना की सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि रात में मारपीट की सूचना मिलने के बाद 112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल महिला को कटघोरा अस्पताल ले गई, लेकिन आरोपी को उस समय हिरासत में नहीं लिया गया। 112 के अस्पताल जाने के बाद आरोपी अपने घर में ही रहा। इसके बाद सुबह महिला की मौत की सूचना मिलने पर पुलिस करीब दो घंटे बाद घटनास्थल पहुंची और तब आरोपी को उसके घर से हिरासत में लिया गया।

घर के बाहर तक लाठी से पिटाई का आरोप

पुरेना के कोटवार संजय चौहान के अनुसार, महिला के साथ लाठी से मारपीट की गई थी। बताया जा रहा है कि महिला को घर के अंदर ही नहीं, बल्कि घर के बाहर तक लाठी से पीटा गया। मारपीट होते देख ग्रामीणों ने तत्काल 112 को सूचना दी।

सूचना मिलने पर 112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल मोहन कुंवर यादव को उपचार के लिए कटघोरा अस्पताल ले गई।

बताया जा रहा है कि घटना कल रात करीब 11 बजे हुई।
कटघोरा अस्पताल में महिला का उपचार किया गया। परिजनों के अनुसार, महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे आगे उपचार के लिए कोरबा रेफर किए जाने की बात कही गई थी।लेकिन परिजन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में गंभीर रूप से घायल महिला को वापस उसके घर लाकर छोड़ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

 

यहीं से मामले में एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर महिला की हालत गंभीर थी और उसे कोरबा रेफर किया गया था, तो उसे उच्च चिकित्सा केंद्र तक क्यों नहीं पहुंचाया गया? अगर प्रशासन ध्यान देती और रात में ही घायल महिला को कोरबा जिला चिकित्सालय पहुंचा दिया जाता तो अनुमान लगाया जा रहा है कि महिला की जान बच सकती थी।

एक गंभीर सवाल और स्पष्ट नजर आती है कि रात में आरोपी को क्यों नहीं लिया गया हिरासत में?

 

प्राप्त जानकारी अनुसार आरोपी तीरथ राम कल देर शाम घूम-फिरकर अपने घर पहुंचा था। देर से घर आने और बेवजह घूमने को लेकर उसकी मौसी ने उसे फटकार लगाई। बताया जा रहा है कि मौसी की डांट युवक को इतनी नागवार गुजरी कि उसने घर में रखी लाठी उठाकर मौसी के सिर पर और हाथ पैर पर वार करना शुरू कर दिया और यही नहीं उसने पीटते हुए अपने घर के बाहर लाकर भी डंडे से वार करता रहा, महिला की चीख पुकार सुन मुहल्ले वासी बीच बचाव करने पहुंचे और रात में 112 को घटना की सूचना दी।
सूचना के बाद 112 पुलिस टीम घटनास्थल पहुंची और आनन फानन में ग्रामीण भुवन कंवर और आशीष कंवर के मदद से घायल महिला को कटघोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल रेफर कर दिया, जिसके बाद घर का कोई गार्जियन नहीं होने के वजह से स्थानीय लोगों ने घायल महिला को वापस उसके घर लाकर छोड़ा और उसके परिवार को रेफर की बात बताई, ग्रामीणों के अनुसार, उस समय महिला जीवित थीं और लोगों से बातचीत भी कर रही थीं।

यदि पुलिस के सामने महिला के साथ मारपीट की शिकायत और घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाए जाने की जानकारी थी, तो आरोपी को तत्काल हिरासत में लेने अथवा उसके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

 

मृतका मोहन बाई यादव (लगभग 52 वर्ष) रोजी-मजदूरी कर अपना जीवनयापन करती थीं।
सुबह वार्ड क्रमांक-01 के पार्षद पति शिवरतन कंवर महिला का हालचाल जानने उसके घर पहुंचे। वहां मोहन कुंवर यादव मृत अवस्था में मिलीं।

इसके बाद घटना की सूचना करीब सुबह 10 बजे बांकीमोंगरा थाने में दी गई।

जानकारी के अनुसार, सूचना मिलने के करीब दो घंटे बाद 12 बजे बांकी पुलिस और फॉरेंसिक टीम घटनास्थल पहुंची। खास बात यह रही कि पुलिस के पहुंचने तक आरोपी तीरथ राम यादव अपने घर में ही मौजूद था।

 

इसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया।

एक तरफ रात में मारपीट की सूचना मिलने के बाद घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, वहीं दूसरी तरफ आरोपी के खिलाफ उसी समय कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की बात सामने आ रही है।

अगर आरोपी को रात में ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जाती और मामले को गंभीरता से लिया जाता, तो क्या घटनाक्रम कुछ और हो सकता था?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रात में मारपीट की सूचना पुलिस तक पहुंच चुकी थी, महिला घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाई जा चुकी थी, तो आरोपी को रात में ही हिरासत में क्यों नहीं लिया गया?

क्या समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान?

इस मामले में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल हैं।

अब यह जांच का विषय है कि महिला की मौत मारपीट में लगी चोटों से हुई या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण होगी। यदि मेडिकल रिकॉर्ड में महिला की हालत गंभीर दर्ज थी, तो उसे समय पर उच्च चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी—इसकी भी जांच आवश्यक है।

यह पूरा मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि महिला की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन रात की घटना से लेकर सुबह मौत तक की पूरी कड़ी की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

फिलहाल पुलिस ने मर्ग क्रमांक 45/26 धारा 194 कायम कर आरोपी तीरथ राम यादव को हिरासत में लेकर अपराध क्रमांक 167/26 धारा 103 (1) पंजीबद्ध कर आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया जाएगा। साथ ही पुलिस ने मामले में घटनास्थल का निरीक्षण और कार्यवाही कर संबंधित लोगों एवं ग्रामीणों से पूछताछ शुरू कर अपनी जांच कर रही है।

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