नई दिल्ली(एजेंसी):बिहार के जमुई-समस्तीपुर से लेकर बांका तक, दिल्ली के कालकाजी और ओडिशा के धेनकनाल से महिलाओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ की जो घटनाएं सामने आई हैं, उन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
देश में लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। रेप की घटनाओं ने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर कई बड़े सवाल खड़े किए हैं।
दिल्ली, बिहार और ओडिशा की तमाम घटनाएं, जो हाल के समय में सामने आई हैं, इन्हें भले ही उंगलियों पर गिना जा सके, लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि स्थिति कितनी भयावह है।
NCRB के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में, देश भर में रेप की शिकार बच्चियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जबकि अदालतों में दोषियों को सजा मिलने की दर घटी है।
बच्चियों के साथ रेप के मामलों में चार गुना बढ़ोतरी
देश में बच्चियों के साथ रेप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में पुलिस ने जहां 18 साल से कम उम्र की 10,934 पीड़ित बच्चियों के मामले दर्ज किए थे। वहीं 2024 में यह संख्या 43,675 तक पहुंच गई।
किस उम्र की लड़कियां उत्पीड़न की सबसे ज्यादा शिकार?
2020 से 2024 के बीच 1.83 लाख नाबालिग लड़कियां रेप की शिकार हुईं। वहीं इन आंकड़ों को और बेहतर तरीके से समझें और ये देखें कि किस उम्र वर्ग की लड़कियों के साथ दुष्कर्म की सबसे ज्यादा घटनाएं हुई हैं तो जवाब मिलेगा- टीनएजर।
पांच सालों के आंकड़ों के मुताबिक, 16 से 18 साल की उम्र की लड़कियों के साथ सबसे ज्यादा दुष्कर्म की घटनाएं सामने आई हैं।
- 16 से 18 साल की उम्र की लड़कियां के साथ रेप के 94,503 मामले।
- 12 से 16 साल की उम्र की लड़कियां के साथ रेप के 70,442 मामले।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हर दस में से लगभग नौ पीड़ित इसी उम्र की लड़कियां थीं।
86% मामलों में न्याय में देरी
10 सालों में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण के मामले चार गुना तेजी से बढ़े हैं, लेकिन बच्चियों को न्याय मिलने में देरी हुई है। पिछले एक दशक में इन मामलों में दोषी ठहराए जाने की दर 30 प्रतिशत के करीब रही, जबकि लंबित मामलों का स्तर 85 प्रतिशत से ऊपर रहा है।
2024 में बच्चियों के साथ रेप के मामलों में दोषी ठहराए जाने की दर 30 प्रतिशत थी। वहीं, 86 प्रतिशत मामले अदालत में पेंडिंग (लंबित) रहे।
ये आंकड़े साफ तौर पर अदालतों से न्याय पर सवाल पूछ रहे हैं। पीड़िता परिवार के लोग सालों तक अपनी बच्चियों को न्याय मिलने की उम्मीद में बैठे हैं, लेकिन POCSO मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट होने के बाद भी 86 प्रतिशत मामलों का पेंडिंग रहना सवाल खड़े करता है।
जान-पहचान के लोग ही असली गुनहगार
एनसीआरबी के डेटा के सामने आने से हैरान करने वाली बात ये भी है कि बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले लोग ज्यादातर उनकी पहचान या उनके आस-पास के ही होते हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 में, लड़कियों के साथ रेप के 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पीड़ित की जान-पहचान का व्यक्ति था। इन मामलों में आरोपी ज्यादातर वो व्यक्ति रहा, जिसने लड़की को शादी का झांसा दिया। वहीं कई मामलों में दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और परिवार के सदस्य भी आरोपी पाए गए।





















































