8000 साल पुराना है खाने का स्वाद बढ़ाने वाला सिलबट्टा, पढ़ें हमारे किचन तक पहुंचने की इसकी कहानी

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नई दिल्ली(एजेंसी):एक वो समय था जब घर के आंगन में दादी-नानी और मां बैठकर सिल बट्टे पर चटनी पीसा करती थीं, महक से ही पता चल जाता था कि कौन सी चटनी खाने को मिलने वाली है। पर अब वो महक गायब हो गई, क्योंकि सिलबट्टे का स्थान मिक्सी ने ले लिया है। समय की बचत के चलते मिक्सी भले ही सुविधाजनक हो, असली स्वाद तो उसी ट्रेडिशनल तरीके से बनने वाली चटनी में था। आइए जानते हैं सिलबट्टा भारतीय रसोई का हिस्सा कैसे बना, क्या कहता है इसका इतिहास।

सिलबट्टे का नाम कैसे पड़ा? 

सिलबट्टा शब्द में सिल यानी सपाट या प्लेन पत्थर और बट्टा यानी बेलन के आकार का पत्थर। इसका इस्तेमाल सदियों से भारतीय रसोई में किया जाता रहा है, हां वो बात अलग है कि अब यह रसोई के किसी कोने में रखा मिलेगा।

हड़प्पा कालीन सभ्यता से जुड़ा है सिलबट्टा 

हिसार के नारनौंद क्षेत्र स्थित राखी गढ़ी में हड़प्पा कालीन सभ्यता की पांचवे फेज की खुदाई की गई थी, जिसमें रसोई के बर्तन भी पाए गए थे। टीला नंबर पांच पर मिले अवशेषों में हांडी, छेद वाले जार के साथ सिलबट्टे के भी सबूत मिले थे। इससे पता चलता है कि आज से 8000 साल पहले भी लोग सिलबट्टे का इस्तेमाल किया करते थे। इतिहास में तो सिलबट्टे को हड़प्पा कालीन सभ्यता से भी पुराना यानी नवपाषाण काल से जोड़कर देखा जाता है, ये वो दौर था जब पहली बार पत्थरों और औजार का इस्तेमाल शुरू हुआ था।

सिलबट्टे का अलग-अलग तरह से इस्तेमाल

दक्षिण भारत में ज्यादातर लोग चावल और चटनी पीसने के लिए सिलबट्टे का इस्तेमाल करते थे, जिसका आकार गोल हुआ करता था। इसे वहां के लोग अपनी भाषा में अम्मी कल कहते थे। वहीं, उत्तर भारत समेत बाकी राज्यों में देखेंगे तो सिलबट्टे का आकार चपटा और लंबा दिखेगा। इसके अलावा, इसपर चटनी पीसने का भी लोगों का अंदाज अलग है, कई जगहों पर सिल पर बट्टे को घुमाकर पीसा जाता था तो कई जगहों पर रगड़कर और हाथों के प्रेशर से मसाला या चटनी पिसती थी।

रस्मों में सिलबट्टे का इस्तेमाल 

अगर आप ऐसा सोचते हैं कि सिलबट्टा केवल रसोई का ही हिस्सा है तो यह गलत है। यह भारतीय परंपरा के साथ खासतौर से जुड़ा हुआ है, आज भी कई रस्में हैं जिसमें सिलबट्टा इस्तेमाल होता है। कई जगहों पर हल्दी की रस्म में सिलबट्टे पर हल्दी पीसने की परंपरा है तो कहीं पर पूजा-पाठ के समय सिलबट्टे पर दाल पीसी जाती है।

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