लखनऊ(एजेंसी):अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
मंगलवार को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई 20 पन्नों की जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने जिम्मेदारों पर सवाल उठाने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराने, ट्रस्ट के पुनर्गठन और किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की सिफारिश की है।
एसआईटी ने रिपोर्ट में ये सब लिखा
सूत्रों के अनुसार, अब तक की जांच में एसआईटी ने मंदिर में नकदी चोरी के अलावा भक्तों द्वारा दान किए गए कुछ आभूषणों के भी गायब होने को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया है। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना से जुड़े कर्मचारियों की भर्ती, निगरानी व्यवस्था में खामियां, ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों, बैंक के कर्मचारियों व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पिछली सात जून को मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला चर्चा में आने के बाद 13 जून को सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ के मंडलायुक्त डाॅ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी ने 15 जून से मामले की जांच शुरू की थी। सरकार ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
150 लोगों से पूछताछ की जानकारी
एसआईटी ने फिलहाल अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट व बैंक से जुड़े आरोपितों सहित 150 लोगों से पूछताछ की जानकारी रिपोर्ट में दी है।
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी ने ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, सदस्य डाॅ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव, व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू सहित कुल 14 लोगों को आरोपी बनाया है। जांच के दौरान दर्ज किए गए कई बयान ट्रस्ट के उपलब्ध अभिलेखों से मेल नहीं खा रहे हैं।
ऐसे में एसआईटी मामले की जांच का दायरा और बढ़ा सकती है। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे का ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया है। राज्य सरकार जल्द ही इस रिपोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। इसके बाद गृह मंत्रालय यह तय करेगा कि ट्रस्ट में किन सदस्यों को हटाया जाए।
अब तक दो करोड़ रुपये बरामद
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पांच आरोपितों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर दो करोड़ रुपये बरामद किए जा चुके हैं। एक सप्ताह की जांच में कई प्रकार की खामियां मिलीं हैं और दानपात्रों की चाबी रामशंकर यादव टिन्नू के पास पाई गईं।
यह भी पता चला है कि सेवादारों को गबन की जानकारी पहले से थी। सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने मंदिर के प्रबंधन के लिए पेशेवर तरीका अपनाने, दान राशि की गणना का साप्ताहिक ऑडिट कराने, प्रतिदिन चढ़ावे में आने वाली राशि की इंट्री कराने, सीसीटीवी कैमरों का डाटा स्टोरेज 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने व आरोपितों को जांच पूरी होने तक अयोध्या न छोड़ने की सिफारिश की है।
एसआईटी के अध्यक्ष ने कहा कि प्रारंभिक गोपनीय जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपी गई है। फिलहाल अभी तक की जांच में जो जानकारियां सामने आई हैं उसे रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।
रिपोर्ट में यह भी है खास
जांच रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशनखोरी तक के साक्ष्य जुट गए हैं। साथ ही मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति व गणना प्रक्रिया में भी हेरफेर की आशंका जताई गई है।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा व निर्माण सहायक गोपाल राव को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया गया है। वहीं, चढ़ावा चोरी में 25 से 30 लोगों की सीधी भूमिका सामने आ रही है। बिना तलाशी के मंदिर कर्मियों की आवाजाही पर भी सवाल उठाया गया है।






