कोरबा कलेक्टर कार्यालय का 15 जून होगा घेराव चारों परियोजना के हजारों किसान सम्मिलित होंगे 

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कोरबा@M4S:एसईसीएल की चारों परियोजना कुसमुंडा , गेवरा , दीपका एवं कोरबा क्षेत्र के अंतर्गत  मानिकपुर, बुड़बुड़ सरायपाली,अंबिका करतली,   सिंघाली ,बलगी,सुराकछार ,ढेलवाडीह उपक्षेत्र के द्वारा किसानो की भूमि का  कोल उत्खनन हेतु अधिग्रहण किया गया है । जिनकी रोजगार,मुआवजा, पुनर्वास  के अलावा फसल क्षतिपूर्ति,परिसंपत्तियो का मूल्यांकन,मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति संबंधी कार्यवाही लंबित है। जिसके संबंध में विभिन्न  भूविस्थापित संगठन एवं ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से 17 बिंदुओं में मांग पत्र सौंपते हुए कलेक्टर कार्यालय कोरबा का घेराव करने हेतु नोटिस दिया है । आवेदन में उल्लेख किया गया है कि अर्जन के बाद शासन प्रशासन के निदेशानुसार रोजगार , मुआवजा ,पुनर्वास एवं परिसंपत्तियों के मूल्यांकन संबंधी  कार्यवाही चल रही थी परंतु अभी कुछ वर्षों से  एसईसीएल प्रबंधन निराकरण के लिए गंभीर नहीं है , क्योंकि किसानों को  लाभ प्रदान किए बगैर उत्खनन कार्य सुचारू रूप से संचालित है । इसके साथ ही पिछले 3–4 वर्षों से जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के द्वारा बलपूर्वक  उत्खनन हेतु जमीन प्रबंधन को उपलब्ध कराई जा रही है । जिसके कारण एसईसीएल प्रबंधन समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयासरत नहीं है । इस परिस्थिति मे ग्रामीण समस्या निराकरण हेतु शांतिपूर्वक आंदोलन करते हैं तब प्रबंधन, प्रशासन के द्वारा उनकी मांगों को दबाने के लिए अपराध दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है । एसईसीएल प्रबंधन एवं प्रशासन की जवाबदारी है कि अर्जित भूमि के एवज  में किसानों को रोजगार , उचित मुआवजा,पुनर्वास,मूलभूत सुविधाए एवं अन्य मांगो पर समय सीमा में त्वरित रूप से कार्यवाही कर धरना प्रदर्शन,आंदोलन की स्थिति  उत्पन्न होने न दे । इसके विपरित प्रबंधन के द्वारा रोजगार,मुआवजा पुनर्वास देने में लापरवाही बरती जा रही है जिसके कारण लगातार समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही है । प्रबंधन एवं प्रशासन के इस रवैये से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने जिला कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है ।
फर्जी अपराध दर्ज कर आंदोलन को रोकने का प्रयास 
आंदोलन करने वाले ग्रामीणों को रोकने के लिए प्रबंधन के द्वारा फर्जी अपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जा रहा है । ऐसे अनेक अपराध दर्ज हुए हैं , जिसमें आरोपी बनाए गए लोग घटना स्थल से कोसों दूर स्थित रहे हैं । जिसका प्रमाण भी उपलब्ध है , जिनका घटना से कोई लेना देना नहीं है । प्रबंधन से मांग पूरा कराने हेतु  किसानों के पास संवैधानिक अधिकार शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन करना होता है परंतु इस आंदोलन को कुचलने के लिए एसईसीएल द्वारा फर्जी रिपोर्ट का सहारा लिया जा रहा है ।
 पुराने अर्जन के  रोजगार प्रकरण आज तक लंबित*
आज से लगभग 30-40 वर्ष पूर्व किए गए अधिग्रहित ग्राम के सैकड़ों किसान आज भी अपने नामांकित व्यक्ति को रोजगार दिलाने के लिए  भटक रहे हैं । इन किसानों की भूमि से कोयला उत्खनन किया जा चुका है , जिसके कारण प्रबंधन की मंशा रोजगार देने की नहीं है । उन्हें रोजगार देने से रोकने के लिए विधि के विरुद्ध अनावश्यक नियम को आधार बनाकर रोजगार से वंचित किया जा रहा है। अर्जन के बाद जन्म लिए , नामांकित व्यक्ति को परिवार का सदस्य नहीं मानते हुए रोजगार के लिए अपात्र किया गया है , जबकि माननीय हाई कोर्ट के द्वारा ऐसे कई प्रकरण में रोजगार देने हेतु आदेश दिया जा चुका है । जिसमें रोजगार भी प्राप्त हो गया। तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन के द्वारा 1983 में प्रत्येक खाते में रोजगार देने हेतु आदेशित किया गया है , परंतु शासन के आदेश के विरुद्ध अर्जित दो खाते को जोड़कर एक रोजगार प्रदान किया गया है , जबकि शासन के आदेशानुसार दो रोजगार प्राप्त होना था । पुराने रोजगार के ऐसे भी प्रकरण हैं , जिसमें किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होने के बाद
 भी प्रकरण को लंबित रखा गया है । एसईसीएल के द्वारा  परिसंपत्तियों के मापन में व्यापक पैमाने पर अनियमितताए बरती जा रही है ।  परिसंपत्तियों के मापन हेतु कमेटी का गठन किया गया है । लेकिन गैर तकनीकी जानकार के द्वारा मापन कार्य किया जा रहा है । पुनर्वास की राशि प्रदान करने में भी भेदभाव  किया जा रहा है। कुसमुंडा , गेवरा ,दीपका क्षेत्र में पुनर्वास के बदले 6 लाख एवं कोरबा क्षेत्र  में 3 लाख प्रदान किया जा रहा है , 6 लाख दिए जाने   के संबंध में कंपनी का तर्क यह है कि  कुसमुंडा , गेवरा , दीपका में लाभांश ज्यादा है । जिसके कारण 6 लाख दिया जा रहा है । एसईसीएल के इस विधि विरुद्ध नियम के कारण मानिकपुर ,  बुड़बुड़ , अंबिका क्षेत्र के ग्रामीणों को नुकसान हो रहा है ।
ड्रोन सर्वे पर ग्रामीणों को आपत्ति 
ड्रोन सर्वे के आधार पर संपत्तियों की स्थिति फ्रिज किया जा रहा है ,जबकि उन ग्रामों को कितने वर्षों बाद पुनर्वास दिया जाना है , तय नहीं है । इस दौरान मकान में आवश्यकता अनुसार सुधार  , परिवर्तन, विस्तार करने पर  नया मकान मानते हुए कटौती की जा रही है । ग्रामीणों को रोजगार , मुआवजा प्राप्ति हेतु आवश्यकता अनुसार फौती,  वंश वृक्ष, ऑनलाइन सुधार , राजस्व त्रुटि सुधार, सत्यापन के संबंध में तहसील कार्यालय दीपका , दर्री, कटघोरा, हरदीबाजार एवं पाली एवं जिला कार्यालय पुनर्वास शाखा से वास्ता पड़ता है । जहां व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है ।  वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करने के उपरांत कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश व्याप्त है।
कलेक्टर घेराव विभिन्न संगठनों के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित
कलेक्टर कार्यालय का घेराव इस बार जिले के  विभिन्न संगठनों के द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है। पहले  आंदोलन  एकल संगठन के द्वारा किए जाते थे  परंतु 15 जून को किए जाने वाला  घेराव कार्यक्रम जिले के सभी प्रमुख संगठनों के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है ।

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