संपन्न हुआ धान खरीदी अभियान  : दूसरे साल भी  लक्ष्य से  12 फीसदी दूर रह गया आकांक्षी जिला कोरबा 

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43 हजार 566 किसानों ने समर्थन मूल्य पर बेचा 648  करोड़ के 27 .38 लाख  क्विंटल धान ,नहीं पहुंचे 17 फीसदी किसान , पखवाड़े से उठाव ठप्प होने से  सूख रहे  300  करोड़ रुपए के धान का क्या त्वरित होगा समाधान ! 
कोरबा@M4S:समर्थन मूल्य पर किए जा रहे धान खरीदी अभियान पर शुक्रवार को विराम लग चुका है। कोरबा जिला लगातार दूसरे साल तय लक्ष्य से 12.21 फीसदी दूर  रह गया। वहीं पंजीकृत 17 फीसदी किसान धान बेचने नहीं पहुँचे। तय लक्ष्य 31.19  लाख क्विंटल की पूर्ति में 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 43  हजार 566  किसानों ने 27  लाख 38 हजार 120.40 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 648 करोड़ 66 लाख 07 हजार 227.60  रूपए का धान बेचा ।जिले को खरीफ विपणन वर्ष 2025 -26  में 31.19 लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था। पंजीकृत 52 हजार 556  किसानों के 68 हजार 656 .57 हेक्टेयर रकबे से लक्ष्य की पूर्ति की जानी थी। लेकिन लगातार दूसरे साल  जिला लक्ष्य के करीब पहुंचते पहुँचते 12.21 फीसदी  दूर रह गया।
1 नवंबर से 31 जनवरी तक चले धान खरीदी अभियान में 41 समिति के 65 उपार्जन केंद्रों में 27 लाख 38 हजार 120.40  क्विंटल धान की आवक हुई । 43 हजार 566 किसानों ने  समर्थन मूल्य पर  648 करोड़ 66 लाख 7 हजार 227.60 रुपए का धान बेचा। 88 हजार 54 .60 क्विंटल धान खरीदी कर  उपार्जन केंद्र भैसमा लगातार दूसरे साल सभी 65 उपार्जन केंद्रों में सिरमौर रहा  । खरीदे गए धान में से 31 जनवरी की स्थिति में 14  लाख 13 हजार 970 क्विंटल 51.64 फीसदी धान का उठाव ही हुआ है।
लक्ष्य से 12.21 फीसदी दूर रह गए 
इस साल कोरबा जिले को 31लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था ।जिसकी पूर्ति में जिले में 27 लाख 38 हजार 120.40 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 648 करोड़ 66 लाख 7 हजार 227 .60 रुपए के ही धान की आवक हो सकी। तय लक्ष्य से जिला 3 लाख 80 हजार 879 .6 क्विंटल (12.21 फीसदी ) धान की आवक नहीं हो सकी। गत वर्ष 29 लाख 15 हजार 548.80 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 670 करोड़ 57 लाख 62 हजार 240 रुपए के धान की आवक हुई थी। इस लिहाज से भी जिले में  गत वर्ष की तुलना 1 लाख 77 हजार 428 क्विंटल (6.08 फीसदी)  की खरीदी कम है।
8 हजार 990 किसान नहीं बेच सके धान ,गत वर्ष के आंकड़ों से भी 2 फीसदी  दूर रह गया जिला 
 इस साल धान खरीदी के लिए कुल 52 हजार 566 किसानों नर एग्रिस्टैक पोर्टल पर  पंजीयन कराया था।जिसमें से 8 हजार 990 (17.10 फीसदी) किसान उपार्जन केंद्र में धान ही नहीं बेच सके। गत वर्ष 2024 -25 की तुलना करें तो गत वर्ष 44 हजार 427 किसानों ने समर्थन मूल्य पर  धान बेचा था। इस लिहाज से देखें तो गत वर्ष की तुलना में ही 861 किसान कम रह गए।
300 करोड़ रुपए से अधिक के 13.24  लाख क्विंटल से अधिक धान शेष
जिले में 31 जनवरी की स्थिति में सभी 65 उपार्जन केंद्रों में  13 लाख 24  हजार 150 .40 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 304  करोड़ 55 लाख 45 हजार 920 रुपए का धान उठाव के इंतजार में हैं। मार्कफेड द्वारा शत प्रतिशत धान के उठाव का डीओ तो जारी कर दिया गया है। लेकिन प्रदेश के कई जिलों में राइस मिलरों की दगाबाजी से रिसाइक्लिंग के मामले सामने आने के बाद  पखवाड़े भर से  उठाव पर लगाए गए  प्रतिबंध  ऑनलाइन गेट पास जारी नहीं होने से लगभग पखवाड़े भर से धान का उठाव ठप्प पड़ा है। लेकिन लगातार तेज होते धूप की वजह से खरीदे गए नमीयुक्त धान के वजन में लगातार कमी (सूखत)आ रही है। जिसका वहन हर साल की तरह समितियों को करना पड़ेगा ।  जिले में इस साल उठाव की सबसे लचर व्यवस्था रही। जिसका खामियाजा समितियाँ भुगत रही हैं। जिले के सभी 65 उपार्जन केंद्रों में 13 लाख 24 हजार 150.40 क्विंटल  समर्थन मूल्य पर 304 करोड़ 55 लाख 45 हजार 920 के धान जाम हैं। इनमें 24 उपार्जन केंद्रों में  20 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम हैं। 12 उपार्जन केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम हैं तो 5 उपार्जन केंद्रों में 40 हजार क्विंटल से अधिक धान उठाव के इंतजार में  जाम हैं।40 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम वाले केंद्रों में  हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा),बरपाली (बरपाली) ,भैसमा, कोरबी (पाली) एवं नवापारा शामिल हैं। जिन 12 उपार्जन केंद्रों में 30 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम होने वाले केंद्रों में अखरापाली,कोरबी (पोंडी उपरोड़ा),चैतमा, चिकनीपाली,तुमान,रामपुर,सिरमिना शामिल हैं। उतरदा,कनकी,करतला,केरवाद्वारी,कोथारी,जटगा,बेहरचुआं,फरसवानी, बिंझरा,,श्यांग ,सोनपुरी एवं सोहागपुर शामिल हैं।
उठाव को लेकर मुख्यालय स्तर से नहीं आया है आदेश 
मुख्यालय स्तर से धान के उठाव को लेकर रोक लगी है, आजकल में शासन के निर्देश प्राप्त होने के आसार हैं।
ऋतुराज देवांगन,डीएमओ ,कोरबा (छग)

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