पोला को लेकर मिट्टी-लकड़ी के नंदी बैल और चुकिया की बढ़ी डिमांड  शनिवार को मनाया जाएगा लोक पर्व पोला

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कोरबा@M4S: इस बार छत्तीसगढ़ी लोक पर्व पोला 23 अगस्त को मनाया जाएगा। लोक पर्व पोला हमारी अपनी संस्कृति एवं सभ्यता पशुओं के प्रति भी प्रेम दर्शाती है। इसे लेकर बाजार भी सज चुके हैं। वहीं दूसरी ओर आधुनिकीकरण के कारण किसान बैलों से दूर होते जा रहे हैं। पोला भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। सुबह बैलों को स्नान कराकर हल्दी-अक्षत से तिलक लगाकर पूजा की जाती है। ठेठरी, खुर्मी व चावल से बने पकवान का भोग खिलाया जाता है। किसान पूजा कर कृषि कार्य में सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए उनसे अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं। जिनके यहां बैल नहीं हैं, वे घरों में मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करते हैं। मंदिरों में भी भगवान शिव व नंदी की पूजा होगी। इसके साथ ही पोला को लेकर बाजार में मिट्टी के बैल और अन्य सामाग्री की बिक्री शुरू हो गई है। शहर के विभिन्न जगहों पर दुकान सज गया है।पर्व को लेकर गुरुवार को बाजार में भीड़ रही। बाजारों में मिट्टी और लकड़ी के बैलों का बाजार सज गया है। लोग इनकी पूजा करने खरीदारी कर रहे हैं। मिट्टी से बने बैल के साथ पोला-जाता के खिलौने भी बाजार में रहे। नंदी बैल, चुकी पोरा और अन्य समानों की बिक्री हुई। बाजार में 50 से लेकर 120 रुपए तक नंदी बैल बिके। वहीं खेल सामग्री चुकिया 80 से लेकर 150 रुपए सेट तक बिक रहे थे।

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