कोरबा@M4S:छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ ने बरसों पुराने भूमि अधिग्रहण के बदले लंबित रोजगार प्रकरण,मुआवजा, पूर्व में अधिग्रहित जमीन वापसी, प्रभावित गांव के बेरोजगारों को खदान में काम देने,पुनर्वास गांव में बसे भू विस्थापितों को काबिज भूमि का पट्टा देने के साथ 9 सूत्रीय मांगो को लेकर 13 अगस्त को कटघोरा एसडीएम कार्याल घेराव की घोषणा की है।
जिला प्रशासन और एसईसीएल के आश्वासन से थके भूविस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने की तैयारी को लेकर गांव गांव में बैठक आयोजित की गई।
5 जून 2025 और कई बार अनुविभागीय अधिकारी कटघोरा की उपस्तिथि में कुसमुंडा में पहले भी बैठक हुई और जल्द समस्याओं का समाधान का आश्वासन कटोघरा एसडीएम द्वारा दिया गया लेकिन आज तक कई फाइल दीपका तहसील,कटघोरा एसडीएम कार्यालय और कलेक्ट्रेट में सालों से पड़ी हुई है जिस पर जिला प्रशासन गंभीरता से पहल नहीं कर रही है जिसके कारण कई भू विस्थापितों के रोजगार प्रकरणों का निराकरण नहीं हो पा रहा है।
कटघोरा एसडीएम कार्याल घेराव की तैयारी ने जोर पकड़ लिया है आंदोलन को भू विस्थापितों का व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
किसान सभा के अध्यक्ष जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,सुमेन्द्र सिंह कंवर,जय कौशिक,रमेश दास,राजकुमारी बिंझवार,देव कुंवर आदि ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार, बसावट, पुनर्वास गांव में पट्टा, किसानों की जमीन वापसी एवं अन्य समस्याओं को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है और भू विस्थापितों के साथ धोखाधड़ी कर रही है।
किसान सभा के नेता प्रशांत झा ने कहा कि जिला प्रशासन जमीन अधिग्रहण के लिए पूरे प्रशासनिक ताकतों का प्रयोग कर और ग्रामीणों में दहशत का वातावरण बनाकर जमीनों का अधिग्रहण करता है लेकिन जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार ,बसावट जैसी सुविधाओं को भू विस्थापितों को दिलाने के लिए गंभीरता से पहल नहीं करती है इसलिए भू विस्थापितों के पास सड़कों में उतरकर आंदोलन करने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचा है। भू विस्थापितों को मिलकर संघर्ष तेज करना होगा, ताकि सरकार और एसईसीएल की नीतियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जा सके।
एसडीएम घेराव की प्रमुख मांगों में:
लंबित रोजगार प्रकरणों का निराकरण,पुनर्वास के साथ दीपका तहसील, एसडीएम कार्यालय कटघोरा,और कोरबा कलेक्ट्रेट में भू विस्थापितों के रुके हुए फाइलों का तत्काल निराकरण करने की मांग है।





































