हम दखल देंगे तो कामकाज में बाधा आ सकती
स्वास्थ्य राज्य का विषय
पीठ ने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्य सरकारें अपनी स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियामक उपाय कर सकती हैं। अदालत ने इसे नीतिगत मुद्दा करार देते हुए कहा कि नीति निर्माताओं को इस मामले पर समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और उचित दिशा-निर्देश तैयार करने चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मरीजों और उनके तीमारदारों का शोषण न हो और साथ ही, निजी संस्थाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रवेश करने से हतोत्साहित या अनुचित प्रतिबंध न लगाया जाए।
मरीजों के शोषण पर संवेदनशील हो सरकारें
शीर्ष अदालत ने कहा कि मरीजों और उनके तीमारदारों की मजबूरियों का अनुचित लाभ उठाकर उनका शोषण करने की कथित समस्या के बारे में राज्य सरकारों को संवेदनशील होना होगा। पीठ ने कहा कि संविधान के तहत सरकार का दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के कारण उसे अपने लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राइवेट अस्पतालों की मदद लेनी पड़ी।
बेहतर स्वास्थ्य सुविधा संवैधानिक अधिकार
पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का संवैधानिक अधिकार है। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राइवेट अस्पतालों के योगदान की सराहना करते हुए पीठ ने कहा कि न्यायालय द्वारा दिया गया कोई भी अनिवार्य निर्देश उनके कामकाज में बाधा उत्पन्न कर सकता है तथा इसका व्यापक प्रभाव हो सकता है।
खास दुकान से दवा लेने की बाध्यता नहीं
अदालत ने केंद्र के इस रुख पर गौर किया कि मरीजों या उनके स्वजन पर अस्पताल की दवा दुकानों या किसी खास दुकान से दवाइयां, चिकित्सा उपकरण लेने की कोई बाध्यता नहीं है। पीठ ने हैरानी जताते हुए सवाल किया कि क्या केंद्र या राज्यों के लिए ऐसी नीति बनाना विवेकपूर्ण होगा जो प्राइवेट अस्पतालों की प्रत्येक गतिविधि को नियंत्रित करे।
2018 में सुनवाई पर सहमत हुआ था सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट 14 मई, 2018 को उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि दवा निर्माताओं के सहयोग और मिलीभगत से दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सामग्रियों की कीमतें बढ़ा दी गई थीं। याचिकाकर्ता के पिता ने दलील दी कि देशभर के अस्पतालों में मरीजों की मजबूरियों का फायदा उठाकर लोगों को अस्पताल परिसर स्थित दवा दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।