कोरबा@m4s: रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक और दो-तीन में लगभग 70 से अधिक नल लगाए गए हैं। इनमें से कुछ की टोंटी टूटी हुई है वहीं कुछ नलों से पानी नहीं आ रहा है। प्लेटफार्म नंबर एक में लगभग चार वाटर कूलर हैं, प्लेटफार्म नंबर दो व तीन में तीन वाटर कूलर हैं। इसमें भी कुछ वाटर कूलर खराब हो गए हैं।
सुधार नहीं हुआ तो इस बार भी गर्मी के मौसम में यात्रियों और कर्मचारियों को शीतल पेयजल के लिए भटकना पड़ सकता है। धीरे-धीरे तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। मार्च से तेज गर्मी शुरू हो जाएगी। लेकिन रेलवे प्रबंधन स्टेशन परिसर में पेयजल की सुविधा मुहैया कराने को लेकर ध्यान नहीं दे रहा है। इसे लेकर यात्री परेशान हैं।पिछले कई साल से इसी तरह की अव्यवस्था बनी हुई है। यात्रियों व कर्मचारियों को स्टॉल से महंगे दाम पर पानी की बोतल खरीदकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। इससे अतिरिक्त खर्च यात्रियों को वहन करना पड़ता है।सेकंड एंट्री में पेयजल के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। बनाए स्लैब व नल टूटे हुए हैं, पाइप लाइन भी टूटी हुई है।वाटर एटीएम जब शुरू हुई थी, तब बताया गया था कि यात्रियों को एक रुपए में 300 मिलीलीटर और पांच रुपए में एक लीटर आरओ युक्त पानी उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं बोतल के साथ आठ रुपए में एक लीटर पानी उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। जबकि स्टॉल में निजी कंपनियों का पानी का बोतल 15 से 20 रुपए में बिक रही है।स्टेशन के प्लेटफार्म में शीतल पेयजल नहीं मिलने से यात्री नहीं, बल्कि रेलवे कर्मचारी भी खासे परेशान होते हैं। इसे लेकर कई बार प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन समस्या को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।