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जगदलपुर(एजेंसी):आतंक और संगीन के बल पर जिन पढ़े-लिखे युवाओं को माओवादियों ने अपने जैसा बना लिया था, वे समाज की मुख्य धारा से जुड़ गए। कुम्माकोलेंग और चितलनार के 23 आत्मसमर्पितों ने बताया कि भीतरी इलाकों में दबाव कम हुआ है, जिसे वे महसूस कर रहे थे।
पढ़े-लिखे और इनामी भी
आत्मसमर्पित 23 माओवाद समर्थकों में से 3 एक-एक लाख के इनामी हैं। कमांडर और प्लाटून कमांडर की जिम्मेदारी इन पर थी। इनमें से 5 युवा 12वीं पास हैं और एक बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। इसके अलावा 10वीं और 8वीं पास भी हैं।
सुनाई आपबीती
10वीं पास मयाराम बघेल नक्सलियों का डीएकेएमएस सदस्य था। उसने बताया कि गांव के बड़े-बुजुर्गों के साथ मारपीट कर उन्हें हथियार के बल पर टार्चर किया गया और कहा गया कि युवाओं को नक्सलपंथ से जुडऩे को कहें। आजिज आ चुके बुजुर्ग बेमन से युवाओं की मीटिंग में इस बात के लिए राजी हो गए। बस फिर क्या था, शुरू हो गया नारकीय जीवन का सिलसिला। 12वीं पास गजेंद्रसिंह ठाकुर ने बताया कि नक्सलियों की मीटिंग में नहीं जाने पर गांव से बहिष्कृत करने और उनकी संपत्ति औरों में बांट देने की धमकियां मिलती थी। पूरे परिवार को तबाह होने से बचाने युवाओं ने यह फैसला लिया कि वे नक्सलियों के व्दारा बताया गया काम करेंगे। गजेंद्र कहता है कि ग्रामीण अपना जीवन जी रहे थे। बंदूक की नोंक पर हर काम करने की मंशा रखने वाले नक्सलियों के साथ जुडऩा उनकी मजबूरी बन गई।
उम्मीद लेकर वापसी
हालात का हवाला देते 8वीं पास वीरेंद्र ने बताया कि 12 साल पहले तक वे अच्छे नागरिक के रूप में पहचाने जाते थे। अपने उन्हीं दिनों की याद लेकर वे एक बार फिर सभ्य समाज में लौटे हैं। नवलसिंह ठाकुर ने कहा कि गांव की जनता और माओवादियों के बीच सेतु के रूप में भी उनका उपयोग किया जाता था। ऐसे लोग, जो नक्सल संगठन से नहीं जुडऩा चाहते थे, उन्हें मनाना, समझाना और न मानने की स्थिति में उनके साथ मारपीट की जवाबदारी भी इन्हीं युवाओं पर थी।
सबके पास पहचान पत्र
समर्पित माओवाद 23 समर्थक युवक राशन कार्डधारी हैं। सभी के पास आधार कार्ड भी है। 4 इंदिरा आवास के हितग्राही हैं, 20 के पास मतदाता परिचय पत्र है और 14 लोगों के बैंक एकाऊंट हैं।
इन्होंने किया समर्पण
समर्पण करने वालों में एक लाख का इनामी जनमिलिशिया कमांडर कमलेश नाग, एक लाख का इनामी जनमिलिशिया कमांडर तुलसीराम नाग, इतनी ही रकम का इनामी जनमिलिशिया प्लाटून कमांडर नरेश कुमार कश्यप, जनमिलिशिया उप कमांडर प्रमोद ठाकुर, डीएकेएमएस सदस्य मयाराम बघेल, नवलसिंह ठाकुर, विशंभरसिंह ठाकुर, सतासिंह ठाकुर, जनमिलिशिया सदस्य मोहन ठाकुर, वीरेंद्रसिंह ठाकुर, गजेंद्रसिंह ठाकुर, उमाशंकर ठाकुर, पवन ठाकुर, कंवलसिंह ठाकुर, तोलसिंह ठाकुर, राजकुमार यादव, भंजदेव ठाकुर, अमरसिंह ठाकुर, संघम सदस्य पालेंद्र सिंह, कुशलसिंह ठाकुर, डमलसिंह ठाकुर, परमेश्वर ठाकुर और कमल मंंडावी।
बाहरी लोग बस्तरवासियों का शोषण कर रहे – कल्लूरी
बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी ने कहा कि हम भी हिंसा नहीं चाहते। यही वजह है कि समर्पण करने की इच्छा रखने वालों को पर्याप्त समय और मौका पुलिस दे रही है। आज के समर्पण से यह साबित होता है कि बाहरी लोग बस्तर के लोगों का किस कदर शोषण कर रहे हैं। फिर चाहे वो गरीब-निरीह आदिवासी हों या पढ़े-लिखे काबिल युवा।
कभी आकर्षित नहीं हुए
अधिकतर युवाओं का कहना था कि वे नक्सलवाद की विचारधारा के प्रति कभी आकर्षित नहीं हुए। चूंकि गांव के अधिकतर युवा पढ़े-लिखे हैं और अपनी भलाई समझते हैं, इसलिए वे इस बात को बेहतर तरीके से समझते थे कि ग्रामीणों की भलाई का स्वांग रचने वाले नक्सली कभी किसी के नहीं हो सकते। मजबूरी ने उन्हें 12 साल का लंबा सफर तय करवा दिया।