नई दिल्ली(एजेंसी):करीब तीन साल पहले की बात है। आधी रात को एक इमरजेंसी कॉल आई, जिसने मुझे एक ऐसी सच्चाई से रूबरू कराया, जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। इमरजेंसी वॉर्ड में एक 18 साल का लड़का मौत से लड़ रहा था। वह सांस नहीं ले पा रहा था, सीने में बहुत तेज दर्द था और ब्लड प्रेशर इतना गिर चुका था कि रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था।
उस लड़के की जान तो बच गई, लेकिन हर कोई इतना खुशकिस्मत नहीं होता। जब हमने उसकी लाइफस्टाइल और बैकग्राउंड की जांच की, तो हार्ट अटैक के पीछे की वजहें साफ नजर आईं। बहुत ज्यादा मोटापा, स्मोकिंग, वर्कआउट की कमी, शराब पीना और खूब जंक फूड खाना।
60 वाली बीमारी अब 20 में
कोरोनरी आर्टरी डिजीज को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, क्योंकि ये आमतौर पर 60 की उम्र के बाद ही होती थी। हालांकि, आज एक कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में मैं देख रहा हूं कि यह बीमारी 20-30 उम्र की पीढ़ी को भी अपनी चपेट में रही है।
हालांकि, जेनेटिक्स और फैमिली हिस्ट्री की इसमें अपनी भूमिका होती है, लेकिन लगातार बना रहने वाला स्ट्रेस, नींद की कमी, स्मोकिंग, शराब और एक्सरसाइज की कमी इस घातक को बीमारी को युवाओं के पास खींचकर ला रही है।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम जाती हैं सांसें
इस स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये अचानक और बहुत तेजी से हमला करती है। हार्ट अटैक के शिकार हुए लगभग 30% मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। अचानक होने वाले इस कोलैप्स का कारण दिल की धड़कनों का अचानक बिगड़ना है, जिसके कारण दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट की मॉडिरेट एरोबिक एक्सरसाइज करें। इसके साथ हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योग को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें।
- बिना डॉक्टर या एक्सपर्ट की देख-रेख के बहुत ज्यादा बॉडी बिल्डिंग से दूर रहें।
- स्मोकिंग और शराब पीने जैसी आदतों को पूरी तरह बंद करें।
- रोज कम से कम 7-9 घंटे की सुकून भरी नींद लें।
- जंक और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करें और हेल्दी बैलेंस्ड डाइट लें।
सीपीआर दे सकता है जिंदगी को दूसरा मौका
इमरजेंसी की स्थिति में आम जनता को जागरूक और तैयार होना बेहद जरूरी है। जब कोई व्यक्ति अचानक गिर पड़े, तो एम्बुलेंस के आने तक सीपीआर देना वरदान साबित हो सकता है।
सीपीआर देने का सही तरीका-
अपनी हथेली के निचले हिस्से को व्यक्ति की छाती के बीच में रखें, दूसरी हाथ की उंगलियों को आपस में इंटरलॉक करें और तेजी से दबाएं। छाती को कम से कम 2 इंच गहराई तक दबाना चाहिए और इसकी गति 100 से 120 प्रेशर्स प्रति मिनट होनी चाहिए। हर दबाव के बाद छाती को पूरी तरह वापस अपनी स्थिति में आने दें।
(डॉ. तमिरुद्दीन दानवाडे, कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, मेडिकवर हॉस्पिटल्स, खारघर, नवी मुंबई)





















































