वाशिंगटन(एजेंसी):जहां 15 साल की उम्र में अधिकतर किशोर पढ़ाई, दोस्तों और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, वहीं अमेरिका के वरमोंट राज्य का छात्र डीन रॉय एक अनोखा रिकॉर्ड बनाने जा रहा है।
डीन की उम्र अभी इतनी नहीं है कि वे खुद वोट डाल सकें या अकेले कार चला सकें, लेकिन नवंबर में होने वाले वरमोंट गवर्नर पद के चुनाव के बैलेट पेपर पर उनका नाम आधिकारिक प्रत्याशी के रूप में दर्ज होगा।
टीचर के मजाक को बनाया चुनौती
इस सब की शुरुआत तब हुई जब डीन 8वीं कक्षा में पढ़ई कर रहे थे। इसी दौरान वे राज्य विधानसभा में इंटर्नशिप कर रहे थे। उस समय एक शिक्षक ने मजाक में उनसे चुनाव लड़ने की बात कही।
इसके बाद उन्होंने नियमों की पड़ताल की और पाया कि वरमोंट राज्य के संविधान में गवर्नर पद का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु की कोई बाध्यता नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपनी मां चेसी के साथ मिलकर पोस्ट ऑफिस के बाद लोगों से संपर्क किया और चुनाव में उतरने के लिए जरूरी 500 मतदाताओं के हस्ताक्षर जुटा लिए।
फ्रीडम एंड यूनिटी पार्टी का गठन
डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन जैसी पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों से अलग हटकर डीन रॉय ने फ्रीडम एंड यूनिटी पार्टी नाम से अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई है। डीन का मानना है कि बुजुर्ग राजनेताओं ने युवा पीढ़ी (जेन-जी) की बुनियादी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
डीन का कहना है कि हमारा मकसद सिर्फ चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि राजनीति में ऐसा प्रभाव छोड़ना है कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं को युवाओं की आवाज सुनने के लिए मजबूर होना पड़े।
सर्वे में मिला 3% समर्थन
न्यू हैंपशायर यूनिवर्सिटी के एक हालिया सर्वे में 15 वर्षीय निर्दलीय हाई स्कूल छात्र डीन रॉय को 3 प्रतिशत समर्थन मिलता दिख रहा है, जो राजनीति के विशेषज्ञों के लिए एक चौंकाने वाला आंकड़ा है।
डीन पढ़ाई करने के साथ-साथ अपने माता-पिता के पिज्जा रेस्टोरेंट में भी हाथ बटाते हैं।
सोशल मीडिया पर मिल रही लोकप्रियता
सोशल मीडिया पर वे अपने बेबाक और संतुलित विचारों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। डीन किसी एक पार्टी की विचारधारा से बंधने के बजाय मुद्दों के आधार पर फैसला लेते हैं।
वे अरबपतियों की संपत्ति पर सीमा तय करने के पक्षधर हैं, तो वहीं बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सरकारी रोक का विरोध करते हैं।
डीन यह भी जानते हैं कि राज्य के मौजूदा और लोकप्रिय गवर्नर फिल स्कॉट को हराना आसान नहीं है, लेकिन उनकी यह उम्मीदवारी युवाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया प्रतीक बन चुकी है।





















































